नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र में नारी शक्ति वंदन अधिनियम (Nari Shakti Vandan Adhiniyam) समेत तीन महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष को कड़ा संदेश दिया। पीएम मोदी ने महिला आरक्षण के ऐतिहासिक महत्व को रेखांकित करते हुए उन ताकतों पर तीखा प्रहार किया जिन्होंने अतीत में इस कानून की राह में रोड़े अटकाए थे।
“2024 में विरोध की हिम्मत क्यों नहीं हुई?”
प्रधानमंत्री ने सदन में विपक्षी दलों को याद दिलाया कि महिलाओं के अधिकारों का विरोध करने का अंजाम क्या होता है। उन्होंने कहा:
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ऐतिहासिक गलती: पीएम ने कहा कि यह कानून 25-30 साल पहले ही लागू हो जाना चाहिए था। अगर ऐसा होता तो आज स्थिति बहुत बेहतर होती।
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विरोधियों को चेतावनी: “अतीत में महिलाओं को अधिकार देने का जिस-जिसने विरोध किया, देश की महिलाओं ने उनका हाल बुरे से बुरा किया है। महिलाओं ने उन्हें कभी माफ नहीं किया।”
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2024 का उदाहरण: पीएम ने चुटकी लेते हुए कहा कि 2024 के चुनाव में किसी ने भी महिला आरक्षण का विरोध करने की हिम्मत नहीं की, क्योंकि उन्हें पता था कि इसकी राजनीतिक कीमत क्या होगी।
क्रेडिट की राजनीति से ऊपर उठने की अपील
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि वह इस कानून का श्रेय अकेले नहीं लेना चाहते। उन्होंने सभी दलों से साथ आने का आह्वान करते हुए कहा:
“अगर हम सब मिलकर इस दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो इसका क्रेडिट सिर्फ मोदी को नहीं, बल्कि आप सभी को मिलेगा। यह किसी एक पार्टी की जीत नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की जीत होगी।”
विकसित भारत का असली मतलब
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘विकसित भारत’ की नई परिभाषा देते हुए कहा कि प्रगति का मतलब केवल इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं है।
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केवल रेल-सड़क नहीं: विकसित भारत का मतलब सिर्फ शानदार रेल, आधुनिक सड़कें या बड़ी परियोजनाएं नहीं हैं।
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नीति निर्धारण में हिस्सेदारी: इसका असली अर्थ तब चरितार्थ होगा जब देश की आधी आबादी (महिलाएं) नीति निर्धारण और कानून बनाने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनेंगी।
जागरूक महिला शक्ति का ‘शक्ति प्रदर्शन’
पीएम मोदी ने नेताओं को जमीनी हकीकत से रूबरू कराते हुए कहा कि अब महिलाएं चुप बैठने वाली नहीं हैं।
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सशक्त महिलाएं: पिछले 25-30 वर्षों में लाखों महिलाएं पंचायतों और स्थानीय निकायों के माध्यम से चुनाव जीतकर जागरूक हो चुकी हैं।
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रास्ते का रोड़ा: “जो भी राजनीतिक जीवन में सफल होना चाहते हैं, वे जान लें कि महिलाएं अब सशक्त हैं। जो कोई भी अब उनके रास्ते में रोड़ा बनेगा, महिलाएं उसे छोड़ने वाली नहीं हैं।”
सदन में पेश हुए तीन अहम बिल
प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान सदन में इन तीन विधेयकों पर गर्मागर्म बहस जारी रही:
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नारी शक्ति वंदन अधिनियम: लोकसभा और विधानसभाओं में 33% आरक्षण।
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परिसीमन विधेयक, 2026: सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव।
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संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026।
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