गाजीपुर। उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के कटारिया गांव में हुई निशा विश्वकर्मा हत्याकांड और उसके बाद समाजवादी पार्टी के डेलिगेशन पर हुए पथराव ने प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने खुद मोर्चा संभालने का फैसला किया है। अखिलेश यादव 29 अप्रैल (बुधवार) को गाजीपुर के दौरे पर रहेंगे, जहां वे पीड़ित परिवार से मुलाकात कर अपनी संवेदनाएं व्यक्त करेंगे।
29 अप्रैल का आधिकारिक प्रोटोकॉल जारी
अखिलेश यादव के गाजीपुर दौरे को लेकर आधिकारिक प्रोटोकॉल जारी कर दिया गया है।
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मुलाकात का समय: अखिलेश यादव दोपहर करीब 1:00 बजे पीड़ित सियाराम विश्वकर्मा के घर पहुंचेंगे।
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सुरक्षा व्यवस्था: चूंकि अखिलेश यादव को ‘जेड प्लस’ सुरक्षा प्राप्त है, इसलिए पथराव की हालिया घटना को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस विभाग में हलचल तेज हो गई है। चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं।
क्यों तनावपूर्ण है माहौल? (पथराव की घटना)
अखिलेश यादव का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दो दिन पहले ही गांव में भारी हिंसा हुई थी।
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सपा प्रतिनिधिमंडल पर हमला: सपा का एक प्रतिनिधिमंडल, जिसमें पूर्व मंत्री रामाश्रय विश्वकर्मा शामिल थे, पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचा था।
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ग्रामीणों से झड़प: बातचीत के दौरान अचानक ग्रामीणों और सपा नेताओं के बीच विवाद हो गया। देखते ही देखते दोनों तरफ से पत्थरबाजी शुरू हो गई।
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पुलिस भी हुई चोटिल: इस हिंसक झड़प में रामाश्रय विश्वकर्मा समेत कई सपा कार्यकर्ता घायल हुए। बीच-बचाव करने पहुंची पुलिस टीम पर भी पथराव हुआ, जिसमें कई जवान जख्मी हो गए। सभी घायलों का इलाज फिलहाल मेडिकल कॉलेज में चल रहा है।
अखिलेश का योगी सरकार पर निशाना
इस घटना को लेकर अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब जन प्रतिनिधियों पर इस तरह के हमले हो रहे हैं, तो आम जनता कितनी सुरक्षित होगी। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
निशा हत्याकांड: क्या है पूरा मामला?
गाजीपुर के कटारिया गांव की रहने वाली निशा विश्वकर्मा की हत्या के बाद से ही इलाके में आक्रोश व्याप्त है। पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है। समाजवादी पार्टी इस मुद्दे को लेकर लगातार सरकार को घेर रही है और इसे पिछड़े समाज पर उत्पीड़न का मामला बता रही है।
अखिलेश यादव के इस दौरे के बाद गाजीपुर की राजनीति में और अधिक उबाल आने की संभावना है, क्योंकि प्रशासन के लिए सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती साबित होगा।
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