अखिलेश-शंकराचार्य की मुलाकात से यूपी में सियासी उबाल: अविमुक्तेश्वरानंद के ‘गो-प्रतिष्ठा’ अभियान को मिला सपा का साथ, भाजपा के खिलाफ बड़ी मोर्चेबंदी

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में गुरुवार को उस वक्त बड़ी हलचल देखने को मिली, जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव अचानक ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मिलने उनके लखनऊ प्रवास स्थल पहुंचे। इस मुलाकात को केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि शंकराचार्य विवाद और आगामी चुनावों के मद्देनजर भाजपा के खिलाफ एक मजबूत धार्मिक-सियासी मोर्चेबंदी के तौर पर देखा जा रहा है।

शंकराचार्य के दरबार में अखिलेश: संतों का लिया आशीर्वाद

लखनऊ के कृष्णा नगर में प्रवास कर रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मिलने पहुंचे अखिलेश यादव ने संतों को हाथ जोड़कर प्रणाम किया और आशीर्वाद लिया। उनके साथ पूर्व सांसद अनु टंडन भी मौजूद रहीं। गौरतलब है कि शंकराचार्य ने 7 मार्च को वाराणसी से ‘गो-प्रतिष्ठा जनजागरण अभियान’ की शुरुआत की थी, जो विभिन्न जिलों से होते हुए अब राजधानी लखनऊ पहुंची है। अखिलेश की इस मौजूदगी ने साफ कर दिया है कि सपा अब हिंदुत्व के एजेंडे पर भाजपा को घेरने की तैयारी में है।

’26 शर्तों’ पर घमासान: सरकार पर बरसे अविमुक्तेश्वरानंद

मुलाकात के बाद माहौल तब और गरमा गया जब शंकराचार्य ने प्रदेश सरकार पर तीखे जुबानी बाण छोड़े। उन्होंने खुलासा किया कि उनके कार्यक्रम को रोकने की हर संभव कोशिश की गई। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, “पहले काशी के मठ में रोकने की योजना बनी, फिर लखनऊ में एंट्री न देने की। अंत में रात 9 बजे पहले 16 और फिर 10 और शर्तें जोड़कर कुल 26 पाबंदियों के साथ कार्यक्रम की अनुमति दी गई।” उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सनातन धर्म में पद सोपान तय हैं, जहाँ शंकराचार्य ‘सुप्रीम कोर्ट’ की तरह हैं।

चतुरंगिणी सेना का ऐलान और 81 दिन की ‘गविष्टि यात्रा’

शंकराचार्य ने उत्तर प्रदेश के लिए एक व्यापक योजना का शंखनाद किया है। उन्होंने बताया कि 3 मई से 23 जुलाई तक वे यूपी की परिक्रमा करेंगे, जिसे ‘गविष्टि यात्रा’ का नाम दिया गया है। इस यात्रा का आगाज और समापन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर से होगा। सबसे चौंकाने वाला ऐलान ‘चतुरंगिणी सेना’ के गठन का रहा। उन्होंने कहा कि गो-हत्या रोकने और सनातन की रक्षा के लिए सन्यासी, बैरागी और गृहस्थों की एक फौज तैयार की जाएगी, जिनका पहले पुलिस वेरिफिकेशन भी कराया जाएगा।

सियासी संदेश: “जो गाय की बात करेगा, वही राज करेगा”

शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि वे कोई राजनीतिक पार्टी नहीं बना रहे हैं, लेकिन उनका संदेश साफ है। उन्होंने कहा, “हमें किसी पार्टी से न नफरत है न प्यार, लेकिन हम जनता से कहेंगे कि जो गाय के लिए काम करे, उसे ही वोट दें।” उन्होंने सत्ता में बैठे लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ‘राजा’ गलत दिशा में जाए तो उसे रास्ता दिखाना हमारा धर्म है। इस कार्यक्रम में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा की मौजूदगी ने विपक्ष की एकजुटता के संकेत भी दे दिए हैं।

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