लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सियासत और एक्शन तेज: 22 दिन में सड़क धंसने पर अखिलेश का तंज, NHAI ने कंपनी को ‘नॉन परफॉर्मर’ घोषित कर टोल किया फ्री

उत्तर प्रदेश के दो सबसे प्रमुख औद्योगिक और सांस्कृतिक महानगरों लखनऊ और कानपुर के बीच सफर को तेज, सुगम और आधुनिक बनाने के लिए बनाए गए लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर इस समय सियासत और तकनीकी लापरवाही को लेकर भारी घमासान मचा हुआ है। जिस सड़क के निर्माण को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे और जनता को उम्मीद थी कि यह सफर को पंख लगा देगी, उसकी अपनी ही रफ्तार उद्घाटन के महज 22 दिन के भीतर धड़ाम हो गई। एक्सप्रेसवे पर जगह-जगह सड़क का धंसना और तारकोल उखड़ना न केवल निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की कार्यशैली को भी कटघरे में ला खड़ा कर रहा है। जनता के टैक्स के पैसों से बने इस हाई-प्रोफाइल प्रोजेक्ट की यह स्थिति अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुकी है।

अखिलेश यादव का तीखा तंज: एक्सप्रेस स्पीड से मरम्मत और पंखे का वायरल किस्सा

इस पूरे मामले पर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार पर तीखा तंज कसा है। अखिलेश यादव ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि यह भाजपाई तरक्की की नई हवा है, जहां कुछ दिनों पहले ही जिसका उद्घाटन हुआ हो, उस सड़क को तुरंत मरम्मत की जरूरत पड़ गई है। उन्होंने हास्यास्पद स्थिति का जिक्र करते हुए लिखा कि एक्सप्रेस स्पीड से की जा रही मरम्मत के दौरान पानी को सुखाने के लिए पंखों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सपा प्रमुख ने तंज कसते हुए सवाल उठाया कि महज दो-तीन हफ्ते में ही जिस एक्सप्रेसवे का दम उखड़ने लगा है, उस पर अपनी जान जोखिम में डालकर सफर करने की हिम्मत कौन उठाएगा। इसके साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि क्या अटल प्रोग्रेस वे भी सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेगा या कभी हकीकत में आकार लेगा, या फिर कागजों पर ही इसका हिस्सा-बांट हो चुका है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में होने वाले निर्माण कार्य टिकते कम हैं और धंसते, ढहते व गिरते ज्यादा हैं।

कहां-कहां और कैसे धंसी सड़क? सिलसिलेवार समझिए पूरा घटनाक्रम

इस बहुप्रतीक्षित एक्सप्रेसवे का भव्य लोकार्पण 13 जुलाई को देश के रक्षा मंत्री और लखनऊ के सांसद राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कर-कमलों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। लोकार्पण के ठीक अगले दिन यानी 14 जुलाई की सुबह 8 बजे से इस पर आम जनता और गाड़ियों की आवाजाही शुरू कर दी गई थी। लेकिन यह खुशी ज्यादा दिन नहीं टिक सकी और महज 12 दिनों बाद 26 जुलाई को उन्नाव जिले के कुरारी गांव के पास कानपुर से लखनऊ आने वाली लेन पर किलोमीटर संख्या 64 पर पहली बार सड़क का तारकोल उखड़ने की घटना सामने आई, जिसके आसपास का हिस्सा भी धंस गया। इसके बाद अगस्त के पहले सप्ताह तक स्थिति और बदतर हो गई और एक्सप्रेसवे पर कुल आठ अलग-अलग स्थानों पर सड़क उखड़ने और गड्ढे होने की घटनाएं सामने आने लगीं। इन प्रमुख स्थानों में किलोमीटर 72, 70, 68, 45.75, 36 और 30.6 शामिल हैं। खासतौर पर किलोमीटर 64 पर बने 200 मीटर लंबे पुल की पूरी सड़क ही उखड़ने से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई, जिसे अब नए सिरे से बनाने का काम किया जा रहा है।

एनएचएआई का कड़ा प्रशासनिक एक्शन: प्रोजेक्ट डायरेक्टर हटाए गए और कंपनी पर गाज

लगातार सामने आ रही इन गंभीर खामियों और जनता के आक्रोश को देखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। एनएचएआई के मुख्य महाप्रबंधक एवं उत्तर प्रदेश क्षेत्रीय अधिकारी गौतम विशाल ने प्रेस को जानकारी देते हुए बताया कि निर्माण एजेंसी के साथ-साथ इस प्रोजेक्ट की देखरेख करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। शुरुआती गाज गिराते हुए कानपुर एक्सप्रेसवे परियोजना के परियोजना निदेशक (पीडी) नकुल प्रकाश वर्मा को उनके पद से हटाकर तुरंत उनके मूल विभाग में वापस भेज दिया गया है। इसके अलावा, इस परियोजना से पूर्व में जुड़े रहे पीडी सौरभ चौरसिया के खिलाफ भी विभागीय आरोप पत्र (चार्शीट) देने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। प्रशासनिक कामकाज को सुचारू रखने के लिए लखनऊ पीडी का अतिरिक्त प्रभार अब बरेली के पीडी नवरत्न को सौंप दिया गया है, ताकि निगरानी के स्तर पर कोई कोताही न बरती जा सके।

निर्माण कंपनी PNC इंफ्राटेक ‘नॉन परफॉर्मर’ घोषित, तीन करोड़ का नुकसान भुगतेगी कंपनी

सड़क निर्माण की गुणवत्ता को ताक पर रखने वाली मुख्य निर्माण एजेंसी पीएनसी इंफ्राटेक (PNC Infratech) पर एनएचएआई का बड़ा हंटर चला है। प्राधिकरण ने इस कंपनी को आधिकारिक तौर पर ‘नॉन परफॉर्मर’ (Non-Performer) घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके साथ ही, इस परियोजना के स्वतंत्र इंजीनियरिंग सलाहकार और निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी करने वाली थीम इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ भी भविष्य की सभी परियोजनाओं से प्रतिबंधित करने की कार्रवाई शुरू की गई है। एनएचएआई ने स्पष्ट किया है कि एक्सप्रेसवे के जितने भी हिस्से क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनका पूरा पुनर्निर्माण और मरम्मत कार्य पीएनसी इंफ्राटेक अपने निजी खर्चे पर करेगी। इस पूरी मरम्मत प्रक्रिया की अनुमानित लागत लगभग तीन करोड़ रुपये आंकी गई है, जिसे कंपनी को खुद ही वहन करना होगा।

मरम्मत पूरी होने तक एक्सप्रेसवे को किया गया पूरी तरह टोल फ्री

यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को सर्वोपरि रखते हुए एनएचएआई ने एक बड़ा राहत भरा कदम उठाया है। जब तक एक्सप्रेसवे के सभी आठों क्षतिग्रस्त स्थानों की तकनीकी मरम्मत का काम पूरी तरह पूरा नहीं हो जाता और विशेषज्ञ समिति अपनी रिपोर्ट नहीं सौंप देती, तब तक इस एक्सप्रेसवे को पूरी तरह से ‘टोल फ्री’ कर दिया गया है। यानी इस अवधि में सफर करने वाले किसी भी वाहन चालक को टोल टैक्स नहीं चुकाना होगा। जिन जगहों पर सड़क धंसी है या जहां मरम्मत का काम चल रहा है, वहां यातायात को सुरक्षित रूप से डायवर्ट कर दिया गया है ताकि किसी भी अनहोनी या दुर्घटना से बचा जा सके और लोग बिना किसी अतिरिक्त आर्थिक भार के अपने गंतव्य तक सुरक्षित पहुंच सकें।

तकनीकी जांच और भविष्य के लिए एक बड़ा सबक

इस पूरी घटना ने देश के बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में गुणवत्ता नियंत्रण और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एनएचएआई अब इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए आधुनिक लेजर प्रोफाइलोमीटर तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है ताकि सड़क की सतह की सूक्ष्म खामियों और छिपे हुए दोषों का पता लगाया जा सके। इसके साथ ही, आईआईटी खड़गपुर के विशेषज्ञों की एक विशेष समिति इस बात की गहन जांच कर रही है कि आखिर इतने बड़े पैमाने पर बनी सड़क इतनी जल्दी क्यों उखड़ी और इसके डिजाइन या सामग्री में क्या तकनीकी त्रुटियां थीं। यह पूरा प्रकरण उत्तर प्रदेश और देश के अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए एक बड़ा सबक है कि विकास के दावों के साथ-साथ गुणवत्ता से कभी भी कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

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