वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका में नौकरी करने का सपना देख रहे भारतीय पेशेवरों के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है। अमेरिकी संसद (Congress) में एक नया विधेयक पेश किया गया है, जिसमें H-1B वीजा कार्यक्रम को तीन साल के लिए स्थगित करने का प्रस्ताव दिया गया है। ‘एंड एच-1बी वीजा एब्यूज एक्ट ऑफ 2026’ (End H-1B Visa Abuse Act of 2026) नाम के इस बिल को रिपब्लिकन सांसदों के एक समूह ने पेश किया है। यदि यह विधेयक कानून बन जाता है, तो इसका सबसे बड़ा प्रहार भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स और इंजीनियरों पर पड़ेगा।
क्यों लगा रहे हैं प्रतिबंध? सांसदों का तर्क
एरिजोना से सांसद एली क्रेन के नेतृत्व में पेश किए गए इस बिल को सात अन्य रिपब्लिकन सांसदों का समर्थन प्राप्त है। इन सांसदों का तर्क है कि अमेरिकी कंपनियां इस वीजा कार्यक्रम का दुरुपयोग कर रही हैं। उनका आरोप है कि अमेरिकी कामगारों को दरकिनार कर कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त किया जा रहा है, जिससे स्थानीय रोजगार बाजार प्रभावित हो रहा है।
प्रस्तावित विधेयक के कड़े प्रावधान: क्या-क्या बदलेगा?
इस विधेयक में H-1B कार्यक्रम को पूरी तरह से बदलने वाले कई सख्त प्रस्ताव रखे गए हैं:
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वीजा सीमा में भारी कटौती: वर्तमान में सालाना 65,000 की सीमा को घटाकर मात्र 25,000 करने का प्रस्ताव है।
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न्यूनतम वेतन की शर्त: एच-1बी वीजा के लिए न्यूनतम वार्षिक वेतन 2,00,000 अमेरिकी डॉलर निर्धारित करने की बात कही गई है।
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आश्रितों पर रोक: वीजा धारकों को अपने जीवनसाथी या बच्चों (Dependents) को अमेरिका लाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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लॉटरी सिस्टम का अंत: मौजूदा लॉटरी सिस्टम को हटाकर इसे वेतन-आधारित चयन प्रणाली में बदलने का प्रस्ताव है।
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OPT प्रोग्राम का खात्मा: छात्रों के लिए उपलब्ध वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण (OPT) को समाप्त करने का भी प्रावधान है।
भारतीयों पर मंडराया सबसे बड़ा खतरा
H-1B वीजा पाने वालों में 72 से 75 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले भारतीयों की होती है। अमेरिकी तकनीकी कंपनियां, विशेष रूप से सिलिकॉन वैली, बड़े पैमाने पर भारतीय इंजीनियरों और विशेषज्ञों को नियुक्त करती हैं।
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नई नियुक्तियों पर ब्रेक: 3 साल के प्रतिबंध से नए वीजा जारी होना बंद हो जाएंगे।
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स्थायी निवास (PR) में बाधा: विधेयक में प्रावधान है कि गैर-प्रवासी वीजा केवल अस्थायी ही रहें, जिससे ग्रीन कार्ड या स्थायी निवासी बनने की राह मुश्किल हो जाएगी।
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एजेंसियों पर प्रतिबंध: थर्ड-पार्टी भर्ती एजेंसियों के माध्यम से रोजगार देने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है, जिससे कई भारतीय आईटी परामर्श कंपनियां (Consultancy Firms) प्रभावित होंगी।
अभी घबराने की जरूरत नहीं: क्या है वास्तविकता?
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह केवल एक विधेयक (Bill) है, जो अभी संसद में पेश किया गया है। अमेरिका में किसी भी विधेयक को कानून बनने के लिए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सीनेट, दोनों से पास होना पड़ता है और फिर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की आवश्यकता होती है। अमेरिकी तकनीकी दिग्गज कंपनियां (जैसे Google, Microsoft, Apple) इस तरह के प्रतिबंधों का कड़ा विरोध करती हैं क्योंकि वे विदेशी प्रतिभाओं पर निर्भर हैं।
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