बीजेपी में राघव चड्ढा को मिली ‘पहली सीख’: नितिन नवीन को नाम से पुकारा तो तरुण चुघ ने टोककर याद दिलाया अनुशासन

नई दिल्ली। हाल ही में आम आदमी पार्टी (AAP) का दामन छोड़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को पार्टी की कार्यशैली और अनुशासन का पहला व्यावहारिक पाठ पढ़ाया गया है। मामला बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के संबोधन से जुड़ा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, राघव चड्ढा को स्पष्ट कर दिया गया है कि बीजेपी में व्यक्ति से बड़ा पद और पद से बड़ा संगठन होता है, इसलिए शिष्टाचार में कोई चूक बर्दाश्त नहीं की जाती।

‘नितिन जी’ नहीं, ‘राष्ट्रीय अध्यक्ष जी’ कहिए

मिली जानकारी के अनुसार, पिछले सप्ताह जब राघव चड्ढा बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात करने पहुंचे, तो बातचीत के दौरान उन्होंने तीन-चार बार अध्यक्ष को उनके नाम ‘नितिन नवीन जी’ कहकर संबोधित किया। राघव की यह संबोधन शैली वहां मौजूद बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को रास नहीं आई। तरुण चुघ ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए राघव चड्ढा को धीरे से टोका और अनुशासन का पाठ पढ़ाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी की परंपरा के अनुसार, उन्हें नाम के बजाय ‘राष्ट्रीय अध्यक्ष जी’ कहकर संबोधित करना चाहिए।

अनुभव में छोटे, पर पद में सबसे बड़े

नितिन नवीन को लेकर इस तरह के निर्देश पहले भी जारी किए जा चुके हैं। चूंकि वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष उम्र और अनुभव में पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं से छोटे हैं, इसलिए अक्सर आपसी चर्चाओं में कई नेता उन्हें नाम से संबोधित कर देते थे। इसे देखते हुए पार्टी ने सभी पदाधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि पुराने निजी संबंध चाहे जो भी हों, लेकिन आधिकारिक चर्चा के दौरान पद की गरिमा और प्रोटोकॉल का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।

जनसंघ के जमाने से है यह परंपरा

बीजेपी एक कैडर आधारित पार्टी है, जहां पदों की गरिमा को बनाए रखना अनुशासन का मुख्य हिस्सा माना जाता है। पार्टी का मानना है कि संगठन में पद सर्वोपरि है। राष्ट्रीय अध्यक्ष को पद के नाम से बुलाने की यह अनकही लेकिन अनिवार्य परंपरा जनसंघ के काल से ही चली आ रही है। राघव चड्ढा के लिए यह वाकया एक संकेत है कि बीजेपी की ‘कॉर्पोरेट’ और ‘कैडर’ संस्कृति उनके पिछले राजनीतिक दल की तुलना में काफी अलग और अधिक अनुशासित है।

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