मुंबई। लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक (संशोधन 2026) के गिरने के बाद विपक्षी खेमे में उत्साह की लहर है। शिवसेना (UBT) के कद्दावर नेता और सांसद संजय राउत ने इस घटनाक्रम को लोकतंत्र की बड़ी जीत करार देते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी की जमकर प्रशंसा की है। राउत ने सरकार पर ‘परिसीमन’ (Delimitation) के बहाने देश के राजनीतिक नक्शे को बदलने की साजिश रचने का आरोप लगाया और दावा किया कि अब प्रधानमंत्री की कुर्सी खतरे में है।
राहुल गांधी के नेतृत्व को बताया ‘प्रभावशाली’
संजय राउत ने राहुल गांधी को देश का सबसे प्रभावशाली नेता बताते हुए कहा, “कल राहुल गांधी ने लोकतंत्र की रक्षा के लिए एक महान आंदोलन का नेतृत्व किया। उन्होंने सरकार की उस साजिश को ध्वस्त कर दिया, जिसके जरिए वे संविधान की आत्मा को चोट पहुंचाना चाहते थे।” राउत के अनुसार, राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्ष ने एकजुट होकर सरकार की ‘तानाशाही’ को संसद के पटल पर मात दी है।
“परिसीमन एक राजनीतिक साजिश थी”: राउत का हमला
संजय राउत ने सोशल मीडिया पर कड़े शब्दों में लिखा कि महिला आरक्षण विधेयक महज एक मुखौटा था। असली मकसद परिसीमन के जरिए लोकसभा की सीटों में हेरफेर करना था। उन्होंने आरोप लगाया:
-
चुनावी नक्शा बदलना: बीजेपी अपनी मर्जी के मुताबिक निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण करके हर चुनाव जीतना चाहती थी।
-
उत्तर-दक्षिण का बंटवारा: सरकार दक्षिणी राज्यों को राजनीतिक रूप से कमजोर करके पूरी सत्ता कुछ चुनिंदा राज्यों के हाथ में केंद्रित करना चाहती थी।
-
संविधान की ताकत: राउत ने कहा कि संसद में बिल का गिरना इस बात का सबूत है कि सरकार अपनी मनमर्जी से संविधान के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकती।
प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बड़ा दावा: “16 सांसदों का खेल”
राउत ने एनडीए सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि अब मोदी सरकार का पतन निकट है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री की कुर्सी अब केवल 16 सांसदों के बहुमत पर टिकी है। राहुल गांधी ने उन सांसदों के गले में राजनीतिक फंदा डाल दिया है। अगर ये संख्या थोड़ी भी कम हुई, तो सरकार को अपना बोरिया-बिस्तर समेटना पड़ेगा।”
मराठी भाषा और अस्मिता पर रुख साफ
मराठी भाषा की अनिवार्यता पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए राउत ने क्षेत्रीय अस्मिता का मुद्दा भी गरमाया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की मातृभाषा मराठी है और यहां रहने, पढ़ने या रोजगार कमाने वाले हर व्यक्ति को स्थानीय भाषा का ज्ञान होना ही चाहिए। उन्होंने इसे आरएसएस और सरकार की खुद की घोषित नीतियों के अनुकूल बताया, जिसमें मातृभाषा को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया