ईरान-इजरायल जंग पर राहुल गांधी का ‘विस्फोटक’ बयान: बोले- जमीन पर 3 देश लड़ रहे, पर असली खेल ‘सुपरपावर्स’ का

नई दिल्ली। मध्य पूर्व (Middle East) में धधक रही ईरान, इजरायल और अमेरिका की जंग ने पूरी दुनिया को दो धड़ों में बांट दिया है। इस वैश्विक महासंकट के बीच कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने एक बड़ा और चौंकाने वाला बयान दिया है। राहुल गांधी ने इस युद्ध के पीछे की छिपी हकीकत पर से पर्दा उठाते हुए कहा है कि यह केवल तीन देशों की आपसी लड़ाई नहीं है, बल्कि परदे के पीछे से बड़ी महाशक्तियां (Superpowers) अपनी बिसात बिछा रही हैं। राहुल के इस बयान ने देश की सियासत में नई बहस छेड़ दी है और केंद्र की मोदी सरकार के लिए भी गंभीर चेतावनियां जारी की हैं।

‘जमीन पर ईरान-इजरायल, पर पीछे चीन और रूस’

राहुल गांधी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि सतह पर यह युद्ध अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच नजर आ रहा है, लेकिन इसकी गहराई में झांकें तो यह अमेरिका, चीन और रूस के बीच की एक भीषण रणनीतिक प्रतिस्पर्धा है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका दुनिया में अपनी सर्वोच्चता (Dominance) बचाए रखने की कोशिश कर रहा है, जबकि चीन लगातार उसे चुनौती दे रहा है। राहुल के मुताबिक, यह जंग केवल हथियारों की नहीं बल्कि वैश्विक व्यापार और वर्चस्व की है, जिसका अखाड़ा फिलहाल मध्य पूर्व बना हुआ है।

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से भारत पर आएगा ‘आर्थिक संकट’

कांग्रेस नेता ने भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले दूरगामी प्रभावों का जिक्र करते हुए सरकार को आगाह किया। उन्होंने कहा कि होर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) से भारत का 40% से ज्यादा तेल आयात होता है। अगर यह मार्ग युद्ध की वजह से बाधित होता है, तो भारत में ईंधन की कीमतें आसमान छूने लगेंगी और आम आदमी की कमर टूट जाएगी। राहुल ने चेतावनी दी कि यदि भारत ने अपनी विदेश नीति में स्पष्टता नहीं दिखाई और इस महाशक्तियों की जंग में उलझ गया, तो देश को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

‘रणनीतिक स्वायत्तता’ पर सवाल और पीएम मोदी की चुप्पी

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी तीखे सवाल उठाए। उन्होंने हिंद महासागर में ईरानी युद्धपोत (IRIS Dena) के डूबने और एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जब संकट हमारे पिछवाड़े तक पहुँच गया है, तब भी देश के नेतृत्व का मौन रहना चिंताजनक है। राहुल ने आरोप लगाया कि भारत अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) खो रहा है और एक ‘समझौतावादी’ रुख अपना रहा है। उन्होंने मांग की कि भारत को अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय मूल्यों के पक्ष में मजबूती से खड़ा होना चाहिए।

 

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