लखनऊ | कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी एक बार फिर कानूनी मुश्किलों में घिरते नजर आ रहे हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राहुल गांधी के खिलाफ ‘आय से अधिक संपत्ति’ (Assets Case) के मामले में दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार की प्रमुख जांच एजेंसियों से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए दस्तावेजों को सीलबंद लिफाफे में सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए हैं।
इन बड़ी एजेंसियों से मांगा गया जवाब
न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति जफीर अहमद की खंडपीठ ने एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दाखिल याचिका पर यह आदेश पारित किया। अदालत ने निम्नलिखित विभागों और एजेंसियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है:
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सीबीआई (CBI): केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो
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ईडी (ED): प्रवर्तन निदेशालय
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एसएफआईओ (SFIO): गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय
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अन्य विभाग: डीओपीटी (DoPT), वित्त मंत्रालय का राजस्व विभाग और कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय।
20 जुलाई को होगी अगली बड़ी सुनवाई
अदालत ने सभी पक्षकारों को अपनी रिपोर्ट और प्रतिशपथ पत्र दाखिल करने के लिए 8 सप्ताह का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 जुलाई 2026 की तारीख तय की गई है। सुनवाई के दौरान सीबीआई के अधिवक्ता ने पुष्टि की कि उन्हें याचिकाकर्ता की शिकायत मिल चुकी है और वे अगली तारीख तक जांच संबंधी स्टेटस रिपोर्ट जमा कर देंगे। वहीं, ईडी ने कोर्ट को बताया कि आरोपों का परीक्षण शुरू कर दिया गया है और प्रगति रिपोर्ट जल्द पेश की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता एस. विग्नेश शिशिर ने राहुल गांधी पर उनकी घोषित आय से कहीं अधिक संपत्ति होने का आरोप लगाते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि शिकायत मिल चुकी है, तो एजेंसियां कानून के अनुसार आरोपों का सत्यापन करें और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।
न्यायालय ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरी पत्रावली (File) को सीलबंद लिफाफे में सुरक्षित रखने का आदेश दिया है ताकि जांच की गोपनीयता बनी रहे।
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