अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और दान की राशि में कथित हेराफेरी (चोरी कांड) का मामला अब बेहद गंभीर राजनीतिक और कानूनी मोड़ ले चुका है। इस बड़े विवाद के सामने आने के बाद विश्व हिंदू परिषद (विहिप) बैकफुट पर नजर आ रही है और संगठन के भीतर असहजता की स्थिति पैदा हो गई है।
इसी दबाव का नतीजा है कि अयोध्या के कारसेवकपुरम में 25 से 29 जून 2026 तक आयोजित होने वाली विहिप की केंद्रीय प्रबंध समिति की पांच दिवसीय राष्ट्रीय बैठक को अचानक स्थगित (Postponed) कर दिया गया है।
5 महीने की तैयारियां धरी की धरी रह गईं
विहिप की यह प्रबंध समिति की बैठक हर साल देश के अलग-अलग राज्यों में आयोजित की जाती है, लेकिन इस बार इसके लिए विशेष तौर पर अयोध्या को चुना गया था।
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बड़ा आयोजन: इस बैठक की तैयारियां पिछले 5 महीनों से चल रही थीं, जिसमें देशभर से लगभग 400 शीर्ष पदाधिकारियों और प्रमुख कार्यकर्ताओं को शामिल होना था।
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ऐन वक्त पर फैसला: सभी तैयारियां अंतिम चरण में थीं, लेकिन बैठक शुरू होने के ठीक एक दिन पहले इसे टालने का आधिकारिक फरमान कारसेवकपुरम पहुंच गया।
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विपक्ष के तीखे सवाल: सूत्रों के मुताबिक, बैठक स्थगित करने की सबसे बड़ी वजह मीडिया और विपक्ष का बढ़ता दबाव है। यदि बैठक होती, तो मीडिया के तीखे सवालों के चलते किसी भी पदाधिकारी के बयान से विवाद और बढ़ सकता था, जिसका सीधा फायदा विपक्ष को मिलता। हालांकि, विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने इस बात को खारिज करते हुए कहा है कि बैठक अन्य (अपरिहार्य) कारणों से टाली गई है।
हाई कोर्ट में 29 जून को संभावित बड़ी सुनवाई (CBI जांच और CAG ऑडिट की मांग)
इस वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों को लेकर अब कानूनी शिकंजा भी कसता जा रहा है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ में इस मामले को लेकर जनहित याचिकाएं (PIL) दाखिल की गई हैं, जिन पर 29 जून 2026 को सुनवाई होने की पूरी संभावना है।
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सीबीआई जांच और कैग ऑडिट (प्रथम याचिका): अधिवक्ता मोहित अशोक द्वारा दाखिल याचिका में मांग की गई है कि राम मंदिर के चढ़ावे में आए धन के कथित गबन की जांच सीबीआई (CBI) या किसी अन्य स्वतंत्र राष्ट्रीय एजेंसी से कराई जाए। इसके साथ ही, मंदिर के संपूर्ण फंड का निष्पक्ष ऑडिट नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) द्वारा कराने का आदेश दिया जाए। बुधवार को समय की कमी के कारण न्यायमूर्ति पंकज भाटिया और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की अवकाशकालीन खंडपीठ इस पर सुनवाई नहीं कर सकी थी।
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उच्चस्तरीय न्यायिक आयोग (दूसरी याचिका): स्थानीय अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने भी एक व्यक्तिगत पीआईएल दाखिल की है, जिसमें पूरे घोटाले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय न्यायिक आयोग गठित करने की मांग की गई है। इस याचिका में केंद्र सरकार, राज्य सरकार, यूपी के डीजीपी, अयोध्या के डीएम, एसएसपी और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को पक्षकार (पार्टी) बनाया गया है।
राजनीतिक घमासान तेज़
इस मुद्दे पर विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार पहले ही बयान दे चुके हैं कि वे मामले में तुरंत एफआईआर (FIR) और 4 महीने के भीतर फास्ट ट्रैक कोर्ट से दोषियों को सजा देने के पक्ष में हैं। वहीं दूसरी तरफ, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत कई विपक्षी नेताओं ने इस मामले की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) को ‘फर्जी’ बताते हुए सीधे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग उठा दी है।
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