प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्रियों का करीबी बनकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले मोहम्मद काशिफ को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। करीब तीन साल से जेल में बंद काशिफ को सर्वोच्च अदालत ने सोमवार को जमानत दे दी है। यह मामला सोशल मीडिया के जरिए रसूख का झांसा देकर धोखाधड़ी करने से जुड़ा है।
क्या था पूरा मामला?
आरोपी मोहम्मद काशिफ पर आरोप है कि उसने फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसी सोशल मीडिया साइट्स पर पीएम मोदी और अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ अपनी मॉर्फ्ड (एडिट की हुई) तस्वीरें साझा की थीं।
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भ्रम की राजनीति: इन तस्वीरों के जरिए वह लोगों को यह यकीन दिलाने की कोशिश करता था कि उसकी सरकार के उच्च अधिकारियों तक सीधी पहुंच है।
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ठगी का जाल: इस झूठे रसूख का फायदा उठाकर उसने लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने और सरकारी ठेके दिलवाने का झांसा देकर 1.10 करोड़ रुपये की ठगी की।
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कानूनी कार्रवाई: यह मामला अप्रैल 2023 में दर्ज एक प्रवर्तन मामला सूचना रिपोर्ट (ECIR) पर आधारित है, जो धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत दर्ज की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दी जमानत?
जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें काशिफ की जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। कोर्ट ने जमानत देते हुए दो मुख्य आधार रखे:
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लंबी हिरासत: आरोपी पहले से ही लगभग तीन साल से जेल में बंद था।
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ट्रायल में देरी: कोर्ट ने गौर किया कि मनी लॉन्ड्रिंग मामले के ट्रायल में काफी देरी हो रही है।
काशिफ को माननी होंगी ये शर्तें
सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी को जमानत देते समय कड़ी शर्तें भी लगाई हैं:
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संवैधानिक अधिकारियों का नाम नहीं: काशिफ ने कोर्ट में यह अंडरटेकिंग (वचन) दी है कि वह भविष्य में किसी भी उच्च संवैधानिक या सरकारी अधिकारी के नाम का इस्तेमाल नहीं करेगा।
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ट्रायल में सहयोग: उसे ट्रायल में पूरी तरह सहयोग करने का निर्देश दिया गया है।
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शर्तों का उल्लंघन: यदि काशिफ अपनी शर्तों या अंडरटेकिंग का उल्लंघन करता है, तो प्रवर्तन निदेशालय (ED) सीधे निचली अदालत जाकर उसकी जमानत रद्द करवाने की मांग कर सकता है।
सुनवाई के दौरान काशिफ के वकील ने दलील दी थी कि उसे मुख्य अपराध (मेन केस) में पहले ही जमानत मिल चुकी है। वहीं, ईडी ने शुरुआत में जमानत का विरोध करते हुए कहा था कि ट्रायल में कोई अनुचित देरी नहीं हुई है, लेकिन कोर्ट ने काशिफ की लंबी जेल अवधि को देखते हुए उसे राहत दे दी।
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