नई दिल्ली: देश के चर्चित कॉर्पोरेट और पारिवारिक विवादों में से एक ‘संजय कपूर संपत्ति विवाद’ में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक बेहद मानवीय और सख्त रुख अपनाया। 30,000 करोड़ रुपये की विशाल संपत्ति के लिए चल रही इस कानूनी जंग में कोर्ट ने न केवल अहम व्यावसायिक फैसलों पर रोक लगाई, बल्कि परिवार के सदस्यों को जीवन के अंतिम सत्य की याद दिलाते हुए आपसी सुलह की भावुक अपील भी की।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: बोर्ड मीटिंग के एजेंडे पर रोक
जस्टिस जेबी पारदीवाला की अध्यक्षता वाली बेंच ने दिवंगत कारोबारी संजय कपूर की कंपनी रघुवंशी इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड (RIPL) द्वारा 18 मई को प्रस्तावित बोर्ड मीटिंग पर रोक लगा दी है। इस मीटिंग में स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति और बैंकों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं (Authorized Signatories) को बदलने जैसे महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब तक मध्यस्थता (Mediation) की प्रक्रिया चल रही है, कोई भी पक्ष ऐसा कदम न उठाए जिससे विवाद और बढ़े।
80 वर्षीय मां बनाम पत्नी: 30,000 करोड़ का टकराव
यह कानूनी लड़ाई संजय कपूर की 80 वर्षीय मां रानी कपूर और उनकी तीसरी पत्नी प्रिया सचदेव कपूर के बीच मुख्य रूप से केंद्रित है। रानी कपूर ने नई याचिका दायर कर चिंता जताई थी कि यदि मध्यस्थता के दौरान बोर्ड में नए निदेशकों की नियुक्ति की गई, तो यह उनके हितों के खिलाफ होगा। कोर्ट ने रानी कपूर की उम्र और उनकी चिंताओं को देखते हुए यह राहत प्रदान की है।
जस्टिस पारदीवाला की भावुक टिप्पणी: “सिर्फ आत्मा साथ जाती है”
सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम का माहौल उस वक्त भावुक हो गया जब जस्टिस पारदीवाला ने दोनों पक्षों को जीवन दर्शन का पाठ पढ़ाया। उन्होंने कहा:
“वह (रानी कपूर) 80 साल की महिला हैं। हम सब खाली हाथ आए थे और हमें खाली हाथ ही जाना है। हम अपने साथ सिर्फ अपनी आत्मा ले जाते हैं। मामले को सुलझाने की इच्छाशक्ति होनी चाहिए।”
कोर्ट ने आगे कहा कि पक्षों को मध्यस्थ के सामने भारी मन से सिर्फ इसलिए नहीं जाना चाहिए क्योंकि कोर्ट ने कहा है, बल्कि उन्हें दिल से इस विवाद को खत्म करने की कोशिश करनी चाहिए।
RBI को निर्देश: नियमों में फिलहाल ढील दें
विपक्षी पक्ष (प्रिया सचदेव और कंपनी) ने दलील दी थी कि स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के निर्देशों के पालन के लिए जरूरी है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने बीच का रास्ता निकालते हुए RBI को निर्देश दिया कि फिलहाल निदेशकों की नियुक्ति से जुड़ी वैधानिक औपचारिकताओं को पूरा करने पर जोर न दिया जाए, ताकि मध्यस्थता प्रक्रिया पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े।
यह मामला अब पूरी तरह से मध्यस्थता के केंद्र में है, जहाँ कोर्ट की उम्मीद है कि 30,000 करोड़ के इस साम्राज्य का फैसला अदालत की तारीखों के बजाय घर की मेज पर बैठकर आपसी सहमति से हो सके।
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