सऊदी अरब का ट्रंप पर दबाव: “होर्मुज की नाकाबंदी हटाओ”, आखिर क्यों डरा हुआ है रियाद

रियाद/वाशिंगटन : मध्य पूर्व में जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच के युद्ध ने अब खाड़ी देशों, विशेषकर सऊदी अरब की चिंताएं चरम पर पहुंचा दी हैं। वाइट हाउस द्वारा ईरान पर दबाव बनाने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में की गई नाकेबंदी का सऊदी अरब कड़ा विरोध कर रहा है। रियाद ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए आत्मघाती साबित हो सकता है।

सऊदी अरब की चिंता: ‘बाब अल-मंडेब’ पर खतरा

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब को डर है कि अगर अमेरिका ने होर्मुज में ईरान की घेराबंदी जारी रखी, तो ईरान जवाबी कार्रवाई में लाल सागर के बाब अल-मंडेब (Bab al-Mandeb) जलमार्ग को बंद कर देगा।

  • सऊदी की लाइफलाइन: होर्मुज में तनाव के बाद सऊदी अरब ने पाइपलाइन के जरिए अपना तेल लाल सागर तक पहुंचाकर निर्यात (70 लाख बैरल प्रतिदिन) बहाल किया है।

  • हूतियों का डर: बाब अल-मंडेब का तटीय क्षेत्र यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के नियंत्रण में है। ईरान हूतियों के जरिए इस मार्ग को बंद करवा सकता है, जिससे सऊदी अरब का पूरा तेल निर्यात ठप हो जाएगा।

ईरान की ‘खुली धमकी’

तेहरान ने साफ कर दिया है कि वह चुप नहीं बैठेगा। ईरान के सर्वोच्च नेता के सलाहकार अली अकबर वेलायती ने कड़े शब्दों में कहा:

“वाइट हाउस अपनी मूर्खतापूर्ण गलतियां दोहराना बंद करे। तेहरान बाब अल-मंडेब को होर्मुज की तरह ही देखता है। वैश्विक ऊर्जा का प्रवाह हमारे एक संकेत पर बाधित हो सकता है।”

ईरानी सशस्त्र बलों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि ईरान के बंदरगाह सुरक्षित नहीं हैं, तो फारस की खाड़ी का कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा।

तेल की कीमतों में आग लगने का डर

युद्ध के पिछले छह हफ्तों में वैश्विक ऊर्जा ढांचे की कमजोरी उजागर हो गई है:

  1. सप्लाई ठप: होर्मुज से दुनिया का 20% तेल और एलएनजी गुजरता है। तनाव के कारण प्रतिदिन 1.3 करोड़ बैरल तेल की आपूर्ति रुक गई है।

  2. कीमतें: कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल चुकी हैं, जिससे दुनिया भर में मुद्रास्फीति का खतरा मंडरा रहा है।

वाइट हाउस का रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे हैं। वाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने कहा कि ट्रंप प्रशासन खाड़ी देशों के संपर्क में है और उनका लक्ष्य होर्मुज को पूरी तरह खुला रखना है ताकि ईरान तेल के नाम पर ‘जबरन वसूली’ न कर सके।

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