दिल्ली से सटे हाईटेक शहर नोएडा की एक आलीशान हाईराइज (ऊंची) इमारत से सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने वाली एक बेहद डरावनी खबर सामने आई है। नोएडा के सेक्टर-119 स्थित ‘अरन्या सोसाइटी’ (Aranya Society) में सोमवार, 29 जून 2026 की सुबह करीब 8:50 बजे एक बहुमंजिला फ्लैट में भीषण आग लग गई। 21वीं मंजिल पर स्थित एक फ्लैट में एयर कंडीशनर (AC) फटने की वजह से लगी इस आग ने देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर लिया और चंद मिनटों में करोड़ों रुपये की यह आलीशान संपत्ति जलकर पूरी तरह खाक हो गई। इस हादसे के बाद पूरी सोसाइटी में हड़कंप, दहशत और अफरा-तफरी का माहौल देखा गया।
AC ब्लास्ट और 3BHK फ्लैट पूरी तरह खाक
जानकारी के मुताबिक, यह भीषण अग्निकांड सोसाइटी के टावर की 21वीं मंजिल पर बने फ्लैट नंबर 2105 में हुआ, जो सुरेश महाजन नाम के व्यक्ति का बताया जा रहा है। सुबह के समय अचानक तेज धमाके के साथ एसी (AC) फट गया और उससे निकली चिंगारियों ने पूरे 3BHK फ्लैट को अपनी चपेट में ले लिया। घर के भीतर मौजूद पीड़ित परिवार ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई। लेकिन इस हादसे में सबसे बड़ा और दर्दनाक नुकसान उस परिवार का हुआ, जिसने अपने जीवन भर की खून-पसीने की गाढ़ी कमाई और सपनों को इस घर को सजाने में लगा दिया था, जो कुछ ही पलों में मलबे के ढेर में तब्दील हो गया।
जब करोड़ों के फ्लैट का फायर सिस्टम ही दे जाए जवाब…
यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं है, बल्कि इसने दिल्ली-एनसीआर की बड़ी-बड़ी हाईराइज सोसायटियों के सुरक्षा दावों पर एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। घटनास्थल पर की गई मीडिया की एक्सक्लूसिव पड़ताल और स्थानीय निवासियों के बयानों ने सोसाइटी बिल्डर और मेंटेनेंस टीम की भारी लापरवाही को उजागर किया है:
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दिखावे के उपकरण: कैमरे और विजुअल्स में साफ देखा गया कि फ्लैट और कॉरिडोर में आधुनिक फायर सेफ्टी के तहत पानी की पाइपलाइनें और वाटर स्प्रिंकलर (Water Sprinklers) लगाए तो गए थे।
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जरूरत पर सिस्टम फेल: लेकिन स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों का गंभीर आरोप है कि जब फ्लैट में आग धधक रही थी और सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब यह ऑटोमैटिक फायर सुरक्षा सिस्टम पूरी तरह ठप पड़ा रहा और प्रभावी तरीके से काम नहीं कर सका।
भरोसे पर बड़ा चोट: जिन सोसायटियों को बिल्डर्स द्वारा ‘आधुनिक जीवन, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और सुरक्षित भविष्य’ के बड़े-बड़े वादे और ब्रोशर दिखाकर करोड़ों रुपये में बेचा जाता है, वहां आपातकालीन स्थिति में प्राथमिक सुरक्षा तंत्र का फेल हो जाना बेहद चिंताजनक है। अगर आग लगने पर पानी के स्प्रिंकलर ही काम न करें, तो गगनचुंबी इमारतों में रहने वाले हजारों परिवार आखिर किसके भरोसे सो रहे हैं?
जवाबदेही किसकी? हाईराइज सोसायटियों के लिए बड़ा सबक
अरन्या सोसाइटी की यह दुखद घटना अब एक राष्ट्रीय बहस और बड़े सवाल के रूप में सामने खड़ी है। क्या इन चमचमाती ऊंची इमारतों में रहने वाले आम नागरिक और उनके बच्चे वास्तव में उतने सुरक्षित हैं, जितना उन्हें मेंटेनेंस चार्ज वसूलते समय बताया जाता है?
फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के पहुंचने से पहले आंतरिक सुरक्षा तंत्र का फेल होना यह साबित करता है कि समय-समय पर होने वाले फायर ऑडिट (Fire Audit) केवल कागजों तक ही सीमित हैं। अब देखना होगा कि नोएडा प्रशासन और फायर विभाग इस घोर लापरवाही पर किसकी जवाबदेही तय करता है, क्या बिल्डर/प्रबंधन पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी और भविष्य में मासूम जिंदगियों को दांव पर लगाने वाले ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कड़े कदम उठाए जाते हैं।
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