इस्लामाबाद/वाशिंगटन। खाड़ी क्षेत्र (Persian Gulf) में ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण सैन्य तनाव और डोनाल्ड ट्रंप की ‘सख्त नाकाबंदी’ के बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जहां दुनिया भर के विशालकाय सुपरटैंकर और 14 बड़े मालवाहक जहाज डर के मारे यू-टर्न ले रहे हैं, वहीं पाकिस्तान के एक तेल टैंकर ‘शालिमार’ ने मौत के मुहाने कहे जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को सफलतापूर्वक पार कर लिया है। अमेरिकी नाकाबंदी लागू होने के बाद इस संकरे जलमार्ग से बाहर निकलने वाला यह पहला व्यावसायिक जहाज बन गया है।
खौफ के साये में ‘शालिमार’ का सफर
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, पिछले तीन दिनों में 14 जहाजों ने पकड़े जाने या हमले के डर से अपना रास्ता बदल लिया था। ऐसे में ‘शालिमार’ की यात्रा किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है:
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लोडिंग: इस अफ्रामैक्स श्रेणी के टैंकर ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के ‘दास द्वीप’ से कच्चा तेल लोड किया।
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अधूरी क्षमता: हैरानी की बात यह है कि टैंकर अपनी पूरी क्षमता से नहीं भरा है। इसमें लगभग 4,50,000 बैरल कच्चा तेल है, जो इसकी कुल क्षमता का आधा ही है।
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मंजिल: ईरान के लारख द्वीप के पास से गुजरते हुए यह टैंकर अब ओमान की खाड़ी में प्रवेश कर चुका है और कराची बंदरगाह की ओर बढ़ रहा है।
यू-टर्न के बाद फिर दिखाई हिम्मत
‘शालिमार’ का यह सफर आसान नहीं था। रविवार को जब अमेरिका-ईरान शांति वार्ता विफल हुई, तो इस टैंकर ने भी डर के मारे यू-टर्न ले लिया था। लेकिन सोमवार को राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा औपचारिक नाकाबंदी की घोषणा के बावजूद, टैंकर ने फिर से प्रयास किया। समुद्री विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान द्वारा पाकिस्तानी जहाजों को मिलने वाली आंशिक छूट और पाकिस्तानी नौसेना के रणनीतिक तालमेल की वजह से यह संभव हो पाया है।
ट्रंप की नाकाबंदी: अब ‘मंजूरी’ के बिना पत्ता भी नहीं हिलेगा
अमेरिकी नौसेना द्वारा जारी किए गए नए नक्शे के अनुसार, यह नाकाबंदी ओमान के ‘रास अल हद्द’ तट से लेकर ईरान-पाकिस्तान सीमा तक फैली हुई है।
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दोहरा पहरा: अब किसी भी जहाज को इस इलाके से गुजरने के लिए अमेरिकी और ईरानी, दोनों सेनाओं से हरी झंडी लेनी पड़ रही है।
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यातायात ठप: फरवरी के अंत में अमेरिका-इजरायल हमलों के बाद से होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या अब सिंगल डिजिट (10 से कम) में सिमट गई है।
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ईरान का निर्यात प्रभावित: मार्च में 17 लाख बैरल प्रतिदिन निर्यात करने वाला ईरान अब नाकाबंदी के कारण दुनिया से लगभग कट चुका है।
पाकिस्तान नेशनल शिपिंग कॉर्प (PNSC) की चुप्पी
समुद्री डेटाबेस ‘इक्वासिस’ के अनुसार, ‘शालिमार’ का मालिकाना हक पाकिस्तान सरकार की कंपनी PNSC के पास है। हालांकि, इस संवेदनशील मिशन की सफलता पर अभी तक पाकिस्तान सरकार या कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पाकिस्तान की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी जीत है, क्योंकि देश पहले से ही भीषण आर्थिक संकट और तेल की कमी से जूझ रहा है।
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