नई दिल्ली: ज्योतिष शास्त्र में कर्मफल दाता शनिदेव की चाल और स्थिति का अत्यंत महत्व है। वर्तमान में शनिदेव मीन राशि में ‘मार्गी’ अवस्था में हैं, जो अनुशासन और धैर्य के साथ कार्य करने वालों के लिए सुनहरे अवसर पैदा कर रहे हैं। विशेष बात यह है कि इस वर्ष 16 मई 2026 को शनि जयंती के अवसर पर ग्रहों का एक दुर्लभ संयोग बन रहा है। एक ओर जहाँ शनिदेव अपनी कृपा बरसाएंगे, वहीं दूसरी ओर वृषभ राशि में तीन बड़े ग्रहों की युति से ‘त्रिग्रही राजयोग’ का निर्माण हो रहा है, जो कई राशियों के लिए भाग्य बदलने वाला साबित होगा।
शनि जयंती पर ग्रहों का महासंगम और त्रिग्रही योग
इस साल शनि जयंती पर ग्रहों का खेल बेहद दिलचस्प है। 14 मई को सुख-ऐश्वर्य के देवता शुक्र अपनी स्वराशि वृषभ में प्रवेश करेंगे। ठीक अगले दिन यानी 15 मई को सूर्य और बुध भी वृषभ राशि में कदम रखेंगे। इस तरह वृषभ राशि में सूर्य, बुध और शुक्र की युति से ‘त्रिग्रही राजयोग’ बनेगा। मीन में मार्गी शनि और वृषभ का यह राजयोग करियर, व्यापार और लीडरशिप से जुड़े लोगों के लिए अपार सफलता के द्वार खोलेगा।
वृषभ राशि: सबसे बड़े लाभार्थी, विदेश से मिलेगा धन
चूँकि यह त्रिग्रही योग वृषभ राशि में ही बन रहा है, इसलिए इस राशि के जातकों के लिए यह समय किसी सपने के सच होने जैसा होगा। शुक्र का अपनी ही राशि में होना आपकी सुख-सुविधाओं और विलासिता में वृद्धि करेगा। जो लोग विदेश व्यापार से जुड़े हैं या बाहर जाने की योजना बना रहे हैं, उन्हें बड़ा आर्थिक लाभ मिल सकता है। आपकी नई योजनाएं और बड़े निवेश भविष्य में जबरदस्त रिटर्न देंगे।
मिथुन राशि: अंतरराष्ट्रीय लाभ और शानदार प्लानिंग
मिथुन राशि के जातकों के लिए भी यह ग्रहों की जुगलबंदी अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगी। त्रिग्रही राजयोग के प्रभाव से आपको सात समंदर पार से व्यापारिक प्रस्ताव या नौकरी के अवसर मिल सकते हैं। आपकी तार्किक क्षमता और संचार कौशल (Communication Skills) इस समय चरम पर होगा, जिससे आप कठिन से कठिन डील को भी अपने पक्ष में करने में सफल रहेंगे।
मेष और कर्क राशि: मंगल के साथ बढ़ेगा पराक्रम
मेष राशि में मंगल का होना और वृषभ में त्रिग्रही योग बनना इन दोनों राशियों के लिए परेशानियों के अंत का संकेत है। मेष राशि के जातकों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, जिससे रुके हुए काम गति पकड़ेंगे। वहीं कर्क राशि के लोगों के लिए सामाजिक प्रतिष्ठा और मान-सम्मान में वृद्धि के योग हैं। मंगल की मजबूती आपको शत्रुओं पर विजय दिलाएगी और करियर में नई ऊंचाइयों तक पहुँचने में मदद करेगी।
शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय
शनि जयंती (16 मई) के दिन शनिदेव के कड़े नियमों का पालन करना आपको दीर्घकालिक लाभ दे सकता है। इस दिन:
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हार्ड वर्क और अनुशासन: अपने कार्यक्षेत्र में पूरी ईमानदारी बरतें।
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दान-पुण्य: काले तिल, सरसों का तेल और काली उड़द की दाल का दान करें।
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मंत्र जाप: ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ का जाप करें।
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कर्म प्रधान बनें: शनिदेव कर्मों के देवता हैं, इसलिए किसी का अहित न करें और जरूरतमंदों की मदद करें।
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