
पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष के स्वर तेज हो गए हैं। खबर है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता कल्याण बनर्जी को लोकसभा में ‘चीफ व्हिप’ (मुख्य सचेतक) बनाए जाने के फैसले ने पार्टी के अंदर एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस फैसले से टीएमसी की कई कद्दावर महिला सांसद बेहद नाराज बताई जा रही हैं, जिससे अब पार्टी में टूट की आशंका गहराने लगी है।
कल्याण बनर्जी की नियुक्ति और महिला सांसदों का गुस्सा
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा में पार्टी को एकजुट रखने और अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी कल्याण बनर्जी को सौंपी गई है। हालांकि, यह फैसला कई महिला सांसदों को रास नहीं आ रहा है। नाराज गुट का मानना है कि कल्याण बनर्जी का व्यवहार और उनकी कार्यशैली अक्सर विवादों में रही है। महिला सांसदों के बीच इस बात को लेकर नाराजगी है कि पार्टी नेतृत्व ने उनकी भावनाओं को नजरअंदाज करते हुए एक ऐसे चेहरे को आगे बढ़ाया है, जिनके साथ तालमेल बिठाना उनके लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
क्या कमजोर हो रही है ममता बनर्जी की पकड़?
ममता बनर्जी हमेशा से अपनी पार्टी में महिलाओं को प्रमुख स्थान देने के लिए जानी जाती हैं। टीएमसी में महिला सांसदों की संख्या अन्य पार्टियों के मुकाबले काफी अधिक है। ऐसे में महिला सांसदों का यह विद्रोह ममता बनर्जी के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। कयास लगाए जा रहे हैं कि यदि इस असंतोष को जल्द नहीं दबाया गया, तो कुछ सांसद पार्टी छोड़ने जैसा बड़ा कदम भी उठा सकते हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह विवाद पार्टी के भीतरी ढांचे को हिला सकता है।
पार्टी के भीतर बढ़ता पावर स्ट्रगल
कल्याण बनर्जी को चीफ व्हिप बनाने के पीछे पार्टी का तर्क है कि वह एक अनुभवी नेता हैं और संसदीय नियमों के अच्छे जानकार हैं। लेकिन विरोध कर रही महिला सांसदों का तर्क है कि पार्टी में कई अन्य अनुभवी चेहरे भी थे जिन्हें यह जिम्मेदारी दी जा सकती थी। इस खींचतान ने टीएमसी के भीतर जारी ‘पावर स्ट्रगल’ को सार्वजनिक कर दिया है। अब सबकी निगाहें ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी पर टिकी हैं कि वे इस बगावत को रोकने के लिए क्या कदम उठाते हैं।
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