लखनऊ/हरदोई: उत्तर प्रदेश में महिलाओं और बेटियों के सम्मान को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) के भीतर से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। हरदोई जिले में सपा के जिलाध्यक्ष शराफत अली का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पार्टी ने बेहद सख्त और बड़ा कदम उठाया है। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर प्रदेश नेतृत्व ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हरदोई की पूरी जिला कार्यकारिणी समेत सभी फ्रंटल संगठनों और प्रकोष्ठों की कमेटियों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है।
क्या है वायरल वीडियो का पूरा विवाद?
यह पूरा मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे एक वीडियो से जुड़ा है। इस कथित वीडियो में हरदोई के सपा जिलाध्यक्ष शराफत अली पार्टी की ही दो बेहद वरिष्ठ महिला नेताओं—पूर्व सांसद ऊषा वर्मा और पूर्व विधायक राजेश्वरी देवी—तथा उनके परिवार के खिलाफ बेहद अमर्यादित और आपत्तिजनक टिप्पणियां करते नजर आ रहे हैं। वीडियो के सामने आते ही हरदोई से लेकर लखनऊ तक सपा खेमे में हड़कंप मच गया और कार्यकर्ताओं के बीच भारी नाराजगी देखने को मिली। हालांकि, इस वायरल वीडियो की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए सपा आलाकमान ने तुरंत एक्शन मोड अपना लिया।
सपा प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने जारी किया कड़ा फरमान
इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा रुख अपनाते हुए समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने एक आधिकारिक पत्र जारी किया। इस पत्र के माध्यम से हरदोई जिले के संगठन को पूरी तरह से निरस्त करने का ऐलान किया गया।
“पार्टी में अनुशासनहीनता और महिला नेताओं के सम्मान से समझौता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर हरदोई की मुख्य जिला कार्यकारिणी के साथ-साथ सभी प्रकोष्ठों की कमेटियों को तत्काल प्रभाव से भंग किया जाता है।”
अपमान के खिलाफ एकजुट हुईं पूर्व सांसद और पूर्व विधायक, अखिलेश से की शिकायत
अपनी ही पार्टी के जिलाध्यक्ष की इस अभद्र भाषा पर पूर्व सांसद ऊषा वर्मा ने बेहद तीखी और कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि राजनीति में महिलाओं के प्रति ऐसी घटिया सोच और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल बेहद निंदनीय है और इसे किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पूर्व सांसद ऊषा वर्मा और उनकी जेठानी व पूर्व विधायक राजेश्वरी देवी ने सीधे सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से संपर्क किया। दोनों वरिष्ठ नेताओं ने सपा प्रमुख को पूरे मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए आरोपी जिलाध्यक्ष के खिलाफ सबसे सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की थी, जिसके बाद यह बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है।
मुलायम सिंह के दौर से है इस राजनीतिक परिवार का दबदबा
हरदोई की राजनीति में पूर्व सांसद ऊषा वर्मा और पूर्व विधायक राजेश्वरी देवी के परिवार का दशकों पुराना और बेहद मजबूत राजनीतिक रसूख है। राजेश्वरी देवी जहां दो बार विधानसभा की दहलीज लांघ चुकी हैं, वहीं ऊषा वर्मा भी हरदोई लोकसभा सीट से तीन बार सांसद निर्वाचित हो चुकी हैं।
इस परिवार की जड़ें समाजवादी आंदोलन से गहराई से जुड़ी हैं। इनके ससुर स्वर्गीय बाबू परमाई लाल उत्तर प्रदेश की समाजवादी राजनीति के कद्दावर चेहरों में गिने जाते थे और वे सपा संरक्षक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के बेहद करीबी और विश्वसनीय सहयोगियों में से एक थे। ऐसे में इस कद्दावर राजनीतिक परिवार की महिलाओं पर टिप्पणी करना मौजूदा जिलाध्यक्ष को बेहद भारी पड़ गया।
पार्टी ने दिया अनुशासन और महिला सम्मान का सख्त संदेश
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में इस समय महिलाओं और बेटियों के सम्मान का मुद्दा बेहद गरमाया हुआ है। ऐसे में समाजवादी पार्टी ने अपने ही जिलाध्यक्ष के खिलाफ इतनी त्वरित और बड़ी संगठनात्मक कार्रवाई करके यह साफ संदेश देने की कोशिश की है कि अनुशासनहीनता और महिला अस्मिता के सवाल पर पार्टी अपनी ही कतारों के खिलाफ भी जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएगी।
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