ब्रिटेन के राजनीतिक गलियारों से सोमवार को आई एक खबर ने पूरी दुनिया को चौंका दिया. साल 2024 के आम चुनाव में लेबर पार्टी को ऐतिहासिक और प्रचंड बहुमत दिलाकर सत्ता के शिखर पर पहुंचे प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) ने अचानक अपने पद से इस्तीफे का ऐलान कर दिया. 10 डाउनिंग स्ट्रीट (10 Downing Street, London) के बाहर दिए गए अपने भावुक विदाई भाषण में स्टार्मर ने इस फैसले को ‘राष्ट्रीय हित’ में उठाया गया कदम बताया. हालांकि, वैश्विक राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्टार्मर का यह इस्तीफा कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है, बल्कि महीनों से सुलग रही आंतरिक बगावत और घटती लोकप्रियता का नतीजा है. आइए विस्तार से समझते हैं वो 5 मुख्य कारण, जो कीर स्टार्मर की विदाई की वजह बने.
1. लेबर पार्टी के भीतर गहराता आंतरिक विद्रोह
कीर स्टार्मर के इस्तीफे की सबसे तात्कालिक और बड़ी वजह उनकी अपनी ही लेबर पार्टी के भीतर मचा भयंकर घमासान था. पिछले कुछ हफ्तों में पार्टी के 100 से अधिक सांसदों (MPs) ने खुले तौर पर स्टार्मर के नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह कर दिया था और उनसे इस्तीफे की तारीख तय करने की मांग की थी. कई वरिष्ठ मंत्रियों ने बंद कमरों में हुई बैठकों में यह आशंका जताई थी कि स्टार्मर के चेहरे के साथ पार्टी अगला आम चुनाव नहीं जीत पाएगी. अपनी विदाई स्पीच में स्टार्मर ने भी इस बात को परोक्ष रूप से स्वीकार किया कि पद पर बने रहने के लिए अब उनके पास आंतरिक समर्थन नहीं बचा था.
2. ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ एंडी बर्नहैम का धमाकेदार उदय
मैनचेस्टर के पूर्व मेयर और लेबर पार्टी के दिग्गज वामपंथी चेहरे एंडी बर्नहैम (Andy Burnham) का हालिया संसदीय उपचुनाव में रिकॉर्ड मतों से जीतना स्टार्मर की कुर्सी के लिए अंतिम कील साबित हुआ. इस जीत के साथ ही बर्नहैम की ब्रिटिश संसद (UK Parliament) में दमदार वापसी हुई, जो लेबर पार्टी के नियमों के तहत प्रधानमंत्री पद की दावेदारी के लिए पहली अनिवार्य शर्त है. बर्नहैम की बढ़ती लोकप्रियता और पार्टी के विभिन्न गुटों में उनके मजबूत आधार ने स्टार्मर पर भारी दबाव बनाया. दिलचस्प बात यह है कि स्टार्मर ने ठीक उसी दिन इस्तीफे का ऐलान किया, जिस दिन बर्नहैम को सांसद के रूप में शपथ लेनी थी.
3. सरकारी नीतियों पर बार-बार ‘यू-टर्न’ लेना
स्टार्मर सरकार पर पिछले 22 महीनों के दौरान सामाजिक कल्याणकारी योजनाओं में कटौती, रक्षा बजट और आर्थिक सुधारों को लेकर लगातार अपने फैसलों से पीछे हटने (U-turns) के गंभीर आरोप लगे. पार्टी के अंदरूनी विरोध और देशव्यापी प्रदर्शनों के आगे झुकते हुए सरकार ने कई बड़े और महत्वपूर्ण नीतिगत फैसलों को या तो पूरी तरह बदल दिया या बेहद कमजोर कर दिया. इन लगातार होने वाले यू-टर्नों की वजह से ब्रिटिश जनता और जमीनी पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच स्टार्मर के नेतृत्व की विश्वसनीयता को भारी नुकसान पहुंचा और उनकी छवि एक कमजोर प्रधानमंत्री की बन गई.
4. पीटर मंडेलसन विवाद और हाई-प्रोफाइल गलतियां
कीर स्टार्मर का कार्यकाल कई राजनीतिक घोटालों और प्रशासनिक गलतियों के साये में रहा. इसमें सबसे बड़ा विवाद तब खड़ा हुआ जब मार्च के महीने में उन्होंने पीटर मंडेलसन (Peter Mandelson) को अमेरिका (Washington) में ब्रिटेन का नया राजदूत नियुक्त करने का फैसला किया. नियुक्ति के तुरंत बाद मंडेलसन के दिवंगत अमेरिकी फाइनेंसर और कुख्यात सेक्स ऑफेंडर जेफरी एपस्टीन से पुराने रिश्तों का खुलासा हो गया. इस फैसले की विपक्ष के साथ-साथ लेबर पार्टी के भीतर भी तीखी भर्त्सना हुई, जिसने स्टार्मर की राजनीतिक साख को पूरी तरह हिलाकर रख दिया.
5. जनसमर्थन में ऐतिहासिक गिरावट और ‘रिफॉर्म यूके’ की चुनौती
विभिन्न जनमत सर्वेक्षणों (Opinion Polls) में कीर स्टार्मर और लेबर पार्टी का ग्राफ लगातार नीचे गिर रहा था. इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स में हुए हालिया स्थानीय और क्षेत्रीय चुनावों में लेबर पार्टी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा. इसी बीच, आप्रवासन-विरोधी (Anti-immigration) दक्षिणपंथी पार्टी ‘रिफॉर्म यूके’ (Reform UK) का ब्रिटिश राजनीति में तेजी से उभार हुआ. रिफॉर्म यूके ने लेबर पार्टी के कई पारंपरिक गढ़ों में बड़ी सेंध लगा दी, जिससे लेबर सांसदों के भीतर यह डर बैठ गया कि स्टार्मर के रहते पार्टी अपने मुख्य वोट बैंक को खो रही है.
अब आगे क्या होगा?
इस्तीफे की घोषणा के साथ ही कीर स्टार्मर ने साफ किया कि लेबर पार्टी के नए नेता और अगले ब्रिटिश प्रधानमंत्री के चुनाव की आधिकारिक प्रक्रिया जुलाई महीने से शुरू कर दी जाएगी. संसद के ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद सितंबर में होने वाले नए सत्र से पहले ब्रिटेन को उसका नया प्रधानमंत्री मिल जाएगा. तब तक स्टार्मर कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभालते रहेंगे ताकि सत्ता का हस्तांतरण सुचारू और शांतिपूर्ण तरीके से पूरा हो सके.
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