
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और महासभा की उच्चस्तरीय चर्चा के दौरान भारत ने एक बार फिर पड़ोसी देश पाकिस्तान और उसके सदाबहार सहयोगी चीन को अंतरराष्ट्रीय मंच का राजनीतिक दुरुपयोग करने पर जमकर लताड़ लगाई है। भारतीय कूटनीतिक दल ने स्पष्ट शब्दों में चेताया कि संयुक्त राष्ट्र जैसे वैश्विक शांति और विकास के मंचों का इस्तेमाल अपने संकीर्ण राजनीतिक एजेंडे और झूठे आख्यानों को साधने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
भारतीय प्रतिनिधि ने पाकिस्तान द्वारा हर अंतरराष्ट्रीय बैठक में अकारण और बेबुनियाद रूप से द्विपक्षीय मुद्दों को खींचने की पुरानी आदत पर तीखा प्रहार किया। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घोषित आतंकवादियों को तकनीकी अड़ंगों के जरिए सुरक्षा कवच प्रदान करने वाले चीन के दोहरे रवैये पर भी कड़ा विरोध दर्ज कराया।
पाकिस्तान के झूठे प्रॉपगैंडा की खुली पोल
भारतीय राजनयिक ने अपने ‘राइट टू रिप्लाई’ का उपयोग करते हुए कहा कि जो देश आतंकवाद का मुख्य निर्यातक रहा है और जहां वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित आतंकी संगठनों को पनाह मिलती है, उसे मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों पर उपदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
पाकिस्तान द्वारा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में बार-बार उठाए जाने वाले मनगढ़ंत दावों को खारिज करते हुए भारत ने दो-टूक कहा कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं और हमेशा रहेंगे। भारत ने रेखांकित किया कि पाकिस्तान को अपने आंतरिक आर्थिक संकट, चरमराती शासन व्यवस्था और अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों पर ध्यान देना चाहिए, न कि दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तमाशा खड़ा करना चाहिए।
आतंकवाद पर चीन के दोहरे चरित्र पर भारत का वार
भारत ने अपने संबोधन में बिना नाम लिए या सीधे संदर्भ में चीन की उन कार्यप्रणालियों को भी घेरे में लिया जिसके तहत वैश्विक आतंकियों को संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध सूची में डालने के प्रस्तावों पर बार-बार ‘टेक्निकल होल्ड’ लगाया जाता रहा है। भारत ने स्पष्ट किया कि जब आतंकवाद से लड़ने की बात आती है, तो ‘अच्छा आतंकवादी’ और ‘बुरा आतंकवादी’ जैसा कोई भेद नहीं हो सकता।
राजनयिक ने कहा कि वैश्विक सुरक्षा को खतरे में डालने वाले तत्वों को भू-राजनीतिक हितों के चलते ढाल बनाना पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ विश्वासघात है। चीन की इस कार्यप्रणाली से बहुपक्षीय मंचों की साख और आतंकवाद-रोधी तंत्र की प्रभावशीलता कमजोर होती है।
वैश्विक मंचों की गरिमा और असली प्राथमिकताओं पर जोर
भारत ने संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों को याद दिलाया कि इस बहुपक्षीय संस्था का प्राथमिक उद्देश्य सतत विकास लक्ष्य (SDGs), जलवायु परिवर्तन, गरीबी उन्मूलन, वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा और वास्तविक शांति की स्थापना करना है। कुछ देशों द्वारा इस गरिमामय मंच को सिर्फ प्रोपेगैंडा टूल बना देने से उन जरूरी विषयों से ध्यान भटकता है जो विकासशील और अल्पविकसित देशों के लिए जीवन-मरण का सवाल हैं।
भारत ने वैश्विक दक्षिण (Global South) की मजबूत आवाज बनते हुए कहा कि नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था (Rules-Based International Order) का सम्मान सभी को समान रूप से करना होगा, चाहे देश छोटा हो या वीटो पावर रखने वाला बड़ा देश।
कूटनीतिक दृढ़ता और स्पष्ट संदेश
संयुक्त राष्ट्र में भारत की यह तीखी प्रतिक्रिया नई दिल्ली की उस कूटनीतिक नीति का प्रमाण है, जिसके तहत भारत किसी भी मंच पर अपने राष्ट्रीय हितों, संप्रभुता और सुरक्षा के मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करता। भारत ने साफ कर दिया है कि वह पाकिस्तान के दुष्प्रचार और चीन के परोक्ष समर्थन को वैश्विक पटल पर बेनकाब करने से कभी पीछे नहीं हटेगा।
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