पश्चिम बंगाल की राजनीति और शासन व्यवस्था में इस समय व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है। सूबे में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नवनिर्वाचित सरकार लगातार बड़े और कड़े नीतिगत फैसले ले रही है। इसी कड़ी में 29 जून 2026 को पश्चिम बंगाल विधानसभा में दो अत्यंत महत्वपूर्ण और सख्त विधेयक ध्वनि मत से पारित किए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा उस कानून की हो रही है जिसके तहत असामाजिक तत्वों को बिना किसी मुकदमे (Trial) के 12 महीने तक एहतियातन हिरासत (Preventive Detention) में रखने का प्रावधान किया गया है।
आइए जानते हैं इस नए कानून की बारीकियां और शुभेंदु अधिकारी सरकार द्वारा लिए गए अन्य 7 बड़े प्रशासनिक व राजनीतिक फैसलों की पूरी रिपोर्ट।
1. बिना मुकदमे 12 महीने तक हिरासत: क्या है यह कानून?
विधानसभा में ‘द वेस्ट बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026’ (The West Bengal Public Safety and Control of Anti-Social Activities Bill, 2026) को मंजूरी मिल गई है।
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कड़े प्रावधान: इस कानून के तहत यदि सरकार या जिला मजिस्ट्रेट (DM) और पुलिस कमिश्नर को यह आशंका होती है कि कोई व्यक्ति समाज में अशांति फैला सकता है, तो उसे बिना ट्रायल के 12 महीने तक नजरबंद या हिरासत में रखा जा सकता है।
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‘गुंडा’ और ‘असामाजिक गतिविधि’ का दायरा बढ़ा: इस कानून में ‘गुंडा’ (Goonda) शब्द की परिभाषा को बेहद व्यापक किया गया है। इसके तहत जबरन वसूली, अवैध कब्जा, वैध व्यापार में बाधा डालने, अवैध खनन, बालू निष्कर्षण (Sand Extraction) और जंगलों की अवैध कटाई करने वालों को भी शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि यह कानून दंगाइयों को रोकने के लिए है और इसका कोई राजनीतिक दुरुपयोग नहीं होगा।
2. दंगाइयों की संपत्ति जब्त कर होगी नुकसान की भरपाई
सरकार ने इसके साथ ही ‘वेस्ट बंगाल मेंटेनेंस ऑफ पब्लिक ऑर्डर (अमेंडमेंट) बिल, 2026’ भी पारित किया है। इसके तहत सूबे में एक ‘क्लेम्स कमिशन’ (Claims Commission) का गठन किया जाएगा। यदि किसी विरोध प्रदर्शन, दंगे या गैर-कानूनी सभा के दौरान सरकारी या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जाता है, तो इस कमिशन के माध्यम से हिंसा के आयोजकों, इसे फाइनेंस करने वालों और उपद्रवियों की संपत्ति से नुकसान की शत-प्रतिशत वसूली की जाएगी।
शुभेंदु सरकार के 6 अन्य बड़े फैसले, जिन्होंने बदली राज्य की नीतियां:
3. नए आपराधिक कानून (BNS) को पूरी तरह किया लागू
देश भर में लागू हुए नए प्रगतिशील कानूनों के तहत पश्चिम बंगाल में भी पुरानी भारतीय दंड संहिता (IPC) और CrPC को पूरी तरह हटाकर भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) को प्रशासनिक स्तर पर पूरी तरह से लागू कर दिया गया है।
4. सीबीआई (CBI) जांच को मिली पूर्ण स्वतंत्रता
इससे पहले राज्य में सीबीआई जांच के लिए दी गई ‘आम सहमति’ (General Consent) को वापस ले लिया गया था, जिससे केंद्रीय एजेंसियों को हर जांच के लिए कोर्ट या राज्य सरकार के चक्कर काटने पड़ते थे। शुभेंदु कैबिनेट ने इस नीति को पलटते हुए सीबीआई को भ्रष्टाचार, जबरन वसूली और बड़े घोटालों से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच करने की पूरी स्वतंत्रता दे दी है।
5. ओबीसी (OBC) सूची में बड़ा संशोधन, आरक्षण में बदलाव
राज्य सरकार ने ‘वेस्ट बंगाल बैकवर्ड क्लासेस अमेंडमेंट बिल, 2026’ को पास कर पूर्ववर्ती सरकार द्वारा जारी की गई ओबीसी सूचियों की व्यापक समीक्षा की है। इसके तहत तृणमूल कांग्रेस (TMC) शासनकाल के दौरान जोड़ी गई कई श्रेणियों को हटाया गया है और राज्य सेवाओं में आरक्षण के ढांचे को पुनर्गठित करते हुए कोटे में बड़े बदलाव किए गए हैं।
6. राज्य के सभी मदरसों का होगा व्यापक सर्वे
कानून व्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से सरकार ने राज्य के भीतर संचालित हो रहे सभी मदरसों का व्यापक सर्वे कराने का आदेश जारी किया है। इस सर्वे के जरिए मदरसों की कार्यप्रणाली, फंडिंग के स्रोत, शिक्षकों की वैधता और वहां दी जा रही शिक्षा के आधुनिक मापदंडों की जांच की जाएगी।
7. धर्म आधारित कल्याणकारी योजनाओं पर लगी रोक
नीतिगत बदलावों के तहत शुभेंदु सरकार ने स्पष्ट किया है कि सरकारी खजाने का उपयोग किसी भी प्रकार की तुष्टिकरण की राजनीति के लिए नहीं किया जाएगा। इसके तहत पूर्व में धर्म विशेष के आधार पर चलाई जा रही कुछ विशिष्ट कल्याणकारी योजनाओं को बंद या संशोधित कर उन्हें सर्वसमावेशी (सभी के लिए समान) बनाने का निर्णय लिया गया है।
8. केंद्रीय योजनाओं की बहाली और सीमा पर BSF को जमीन
राज्य में लंबे समय से लंबित पड़ीं केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं (जैसे आयुष्मान भारत, पीएम आवास योजना और पीएम किसान सम्मान निधि) को बंगाल में तुरंत और प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्रों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सीमा सुरक्षा बल (BSF) को फेंसिंग (बाड़ लगाने) और चौकियों के निर्माण के लिए आवश्यक जमीन तुरंत उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
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