वैदिक ज्योतिष में छाया ग्रह और मोक्ष, वैराग्य, गुप्त विद्याओं व आकस्मिक घटनाओं के कारक ‘केतु’ के गोचर को अत्यंत प्रभावशाली और निर्णायक माना जाता है। केतु हमेशा वक्री यानी उल्टी चाल चलते हैं और जब भी वे किसी राशि या नक्षत्र में अपनी स्थिति बदलते हैं, तो उसका असर जातकों के जीवन में अचानक आने वाले बड़े बदलावों के …
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