इवांका ट्रंप की हत्या की साजिश: IRGC से जुड़े आतंकी की गिरफ्तारी ने खोली पोल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप पर हमले की एक बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े एक खूंखार आतंकी मोहम्मद बाकिर साद दाऊद अल-सादी ने इवांका की हत्या की योजना बनाई थी। अमेरिकी न्याय विभाग की कार्रवाई में इस साजिश को समय रहते नाकाम कर दिया गया है।

क्या थी साजिश?

जांच में सामने आया है कि अल-सादी ने 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए यह प्लान तैयार किया था। अल-सादी सुलेमानी को अपना आदर्श मानता था। उसने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर इवांका ट्रंप और उनके पति जैरेड कुशनर के फ्लोरिडा स्थित आलीशान घर का नक्शा भी साझा किया था। अपनी पोस्ट में उसने धमकी दी थी कि अमेरिकी सीक्रेट सर्विस भी उन्हें बचा नहीं पाएगी और बदला लेना ही उसका एकमात्र लक्ष्य है।

कैसे हुई गिरफ्तारी?

अल-सादी को 15 मई 2026 को तुर्की में उस समय दबोचा गया जब वह रूस भागने की कोशिश कर रहा था। गिरफ्तारी के वक्त उसके पास इराक का एक ‘सर्विस पासपोर्ट’ मिला, जो केवल उच्च-स्तरीय सरकारी कर्मचारियों को मिलता है। इस पासपोर्ट की आड़ में वह दुनिया भर में वीआईपी ट्रीटमेंट का फायदा उठाते हुए आसानी से यात्रा कर रहा था। अमेरिका ने उसे प्रत्यर्पित (Extradite) करा लिया है और अब वह ब्रुकलिन के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में कड़ी निगरानी में है।

आतंकी के कारनामे: यूरोप से कनाडा तक फैला नेटवर्क

अल-सादी महज एक इवांका ट्रंप की हत्या की कोशिश तक सीमित नहीं था, बल्कि उसने पूरी दुनिया में आतंक का जाल फैला रखा था। उस पर यूरोप और अमेरिका में 18 हमलों या उनकी कोशिशों के आरोप हैं, जिनमें प्रमुख शामिल हैं:

  • एम्स्टर्डम (मार्च 2026): बैंक ऑफ न्यूयॉर्क मेलन पर बमबारी।

  • लंदन (अप्रैल 2026): यहूदी समुदाय के लोगों पर चाकू से हमला।

  • टोरंटो (मार्च 2026): अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर गोलीबारी।

  • अन्य: बेल्जियम और रॉटरडैम में धार्मिक स्थलों पर हमले।

सोशल मीडिया पर बेखौफ सक्रियता

हैरानी की बात यह है कि एक सक्रिय आतंकी होने के बावजूद, अल-सादी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय था। वह अक्सर पेरिस के एफिल टॉवर जैसी प्रसिद्ध जगहों पर तस्वीरें पोस्ट करता था। अपने स्नैपचैट और एक्स अकाउंट के जरिए वह सुलेमानी के साथ पुरानी सैन्य तस्वीरें शेयर करने के साथ-साथ अपने पीड़ितों को धमकाने के लिए हथियारों की तस्वीरें भी भेजता था।

फिलहाल, इस मामले पर व्हाइट हाउस की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह गिरफ्तारी बड़ी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि अल-सादी न केवल इवांका ट्रंप के लिए खतरा था, बल्कि वह वैश्विक सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर चुनौती बना हुआ था।

Check Also

‘युद्ध का कोई सैन्य हल नहीं, सिर्फ एक ही रास्ता’: ईरान ने अमेरिका को दिया सीधा संदेश, होर्मुज पर कड़ा रुख

मध्य पूर्व में बढ़ते भीषण तनाव और अमेरिकी दबाव के बीच ईरान ने वाशिंगटन को …