यूपी के 60 हजार बेरोजगारों की किस्मत अब सुप्रीम कोर्ट के हाथ, 72825 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों को सबसे बड़ी आस

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक बनने का सपना देख रहे करीब 60 हजार बेरोजगारों की निगाहें अब देश की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) पर टिकी हैं। सालों से कानूनी दांव-पेच में फंसी विभिन्न शिक्षक भर्तियों के अभ्यर्थियों के लिए सुप्रीम कोर्ट ही अब न्याय की आखिरी उम्मीद बचा है। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा उस भर्ती का है, जो करीब डेढ़ दशक से विवादों की भेंट चढ़ी हुई है।

72825 प्रशिक्षु भर्ती: 15 साल बाद भी अधूरी है डगर

उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित और विवादित 72825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती (2011) आज भी बेरोजगारों के लिए गले की फांस बनी हुई है।

  • विवाद की वजह: 30 नवंबर 2011 को जारी विज्ञापन के बाद लंबी कानूनी लड़ाई चली। 25 जुलाई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने 66,655 नियुक्तियों को तो सुरक्षित कर दिया, लेकिन कटऑफ से अधिक अंक पाने वाले हजारों अभ्यर्थी अब भी बाहर हैं।

  • याचियों की बढ़ती फौज: सुप्रीम कोर्ट के सकारात्मक रुख को देखते हुए याचियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। फिलहाल करीब 32 हजार अभ्यर्थी अवमानना याचिकाओं के जरिए नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।

  • रिक्त पद: इस भर्ती में रिक्त 6,170 पदों पर नियुक्ति को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख सकारात्मक दिख रहा है, जिससे अभ्यर्थियों में नई उम्मीद जगी है।


69000 और 12460 भर्ती: यहाँ भी फंसा है पेंच

सिर्फ 72,825 ही नहीं, अन्य शिक्षक भर्तियों की तस्वीर भी कुछ ऐसी ही धुंधली है:

  1. 69,000 सहायक अध्यापक भर्ती: इस भर्ती में ईडब्ल्यूएस (EWS), आरक्षण विवाद, मेरिट लिस्ट और चयन प्रक्रिया को लेकर दाखिल याचिकाओं से लगभग 25 हजार बेरोजगार जुड़े हुए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में यूपी सरकार से सख्त जवाब तलब किया है।

  2. 12,460 सहायक अध्यापक भर्ती: इसमें रिक्त 656 पदों को लेकर करीब ढाई हजार अभ्यर्थी सुप्रीम कोर्ट के गलियारों में न्याय की गुहार लगा रहे हैं।


तारीख दर तारीख और बढ़ता इंतजार

दिसंबर 2025 तक हजारों अभ्यर्थियों ने अपना प्रोफॉर्मा जमा किया था, लेकिन तकनीकी कारणों और 25 जुलाई 2017 से पहले की याचिकाओं के विवरण न होने की वजह से कई नाम सूची से बाहर रहे। अब जैसे-जैसे सुनवाई की तारीखें टल रही हैं, हताश बेरोजगारों की संख्या और याचिकाओं का अंबार बढ़ता जा रहा है।

अभ्यर्थियों का दर्द:

प्रयागराज से लेकर लखनऊ तक भटक रहे इन अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने पात्रता की सभी शर्तें पूरी की हैं और कटऑफ से ज्यादा अंक भी हासिल किए हैं, लेकिन सिस्टम की खामियों और कानूनी पेच ने उनकी जिंदगी के बेशकीमती 10-15 साल छीन लिए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट का एक आदेश ही इन 60 हजार परिवारों के घर में खुशियां ला सकता है।

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