अयोध्या राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की गिनती के दौरान हुई कथित चोरी और गबन के मामले को लेकर देश का समूचा विपक्ष केंद्र सरकार और मंदिर प्रशासन पर पूरी तरह हमलावर है। बीते दिन जहां कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने विश्व हिंदू परिषद (VHP), आरएसएस (RSS) और बीजेपी को आड़े हाथों लिया था, वहीं आज मंगलवार (7 जुलाई) को राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता अशोक गहलोत ने भी इस मुद्दे पर सरकार को बुरी तरह घेरा है। गहलोत ने जनता का भरोसा बहाल करने के लिए राम मंदिर ट्रस्ट को तत्काल प्रभाव से भंग करने की एक बहुत बड़ी मांग रख दी है।
‘चोरी का पता चलते ही भंग होना चाहिए था ट्रस्ट, लोगों का विश्वास उठ चुका है’
कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने कड़े शब्दों में कहा, “राम मंदिर के पावन चंदे की चोरी का पता लगते ही सरकार को सबसे पहला कदम इस ट्रस्ट को भंग करने का उठाना चाहिए था। लेकिन सरकार ने ऐसा नहीं किया। अभी भी समय है, सरकार को तुरंत राम मंदिर ट्रस्ट भंग कर देना चाहिए। जब तक यह कदम नहीं उठाया जाएगा, तब तक देश की जनता में कोई विश्वास पैदा नहीं होगा। जब ट्रस्ट भंग होगा, तभी देश के करोड़ों राम भक्त निश्चित हो पाएंगे कि अब न्याय होगा।”
‘जब निर्माण कमेटी के चेयरमैन खुद डकैती की बात मान रहे हैं, तो क्या बचा?’
अशोक गहलोत ने मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए एक बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा, “राम मंदिर निर्माण कमेटी के चेयरमैन ने खुद अपने बयान में स्वीकार किया है कि मंदिर में केवल साधारण चोरी नहीं, बल्कि बड़ी ‘डकैती’ हुई है। हालांकि अब उन पर भी कई तरह के आरोप लग रहे हैं। जब आरएसएस और बीजेपी खुद भी अंदरखाने मानती हैं कि चंदे को लेकर कुछ बहुत गलत हुआ है, तो फिर कार्रवाई के लिए क्या बच जाता है? सरकार को इस विवादित ट्रस्ट को तुरंत खत्म कर देना चाहिए, क्योंकि इस मौजूदा ट्रस्ट के रहते हुए लोग कभी भी व्यवस्था पर विश्वास नहीं कर पाएंगे।”
यूपी पुलिस की SIT जांच पर उठाए सवाल, सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज से जांच की मांग
राम मंदिर ट्रस्ट में हुई धांधली की चल रही जांच को लेकर भी पूर्व मुख्यमंत्री ने कई गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा:
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एसआईटी पर अविश्वास: गहलोत ने कहा कि इस मामले में एफआईआर (FIR) दर्ज होने से पहले ही बहुत जल्दबाजी में विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया गया।
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यूपी पुलिस पर तंज: चूंकि इस एसआईटी में उत्तर प्रदेश पुलिस के ही अधिकारी शामिल हैं, इसलिए जनता को यह विश्वास कैसे होगा कि वे पूरी तरह निष्पक्ष और सही जांच कर रहे हैं। इस एसआईटी जांच का कोई खास मतलब नहीं रह जाता।
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गहलोत की मांग: अशोक गहलोत ने मांग की कि इस पूरे घोटाले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कराई जानी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि अयोध्या राम मंदिर के संचालन के लिए केवल धार्मिक गुरुओं और धर्माचार्यों को शामिल कर एक नया और पारदर्शी ट्रस्ट बनाया जाए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी इस पूरे चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ने की अपील की।
भारत-इंडोनेशिया के बीच EVM समझौते पर भी घेरा, बैलेट पेपर की वकालत की
राम मंदिर विवाद के अलावा, अशोक गहलोत ने भारत और इंडोनेशिया के बीच हाल ही में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर हुए एमओयू (MoU) पर भी अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी।
ईवीएम के मुद्दे पर विपक्ष के स्टैंड को दोहराते हुए गहलोत ने कहा:
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देश की शीर्ष अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने भी पूर्व में माना था कि चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता के लिए VVPAT मशीनों को शामिल किया जाना बेहद जरूरी है। इसका साफ मतलब यही है कि अदालत ने भी इस आशंका को स्वीकार किया है कि ईवीएम मशीनों के साथ छेड़छाड़ की गुंजाइश हो सकती है।
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उन्होंने दुनिया का उदाहरण देते हुए कहा कि आज विश्व के अधिकांश विकसित और तकनीकी रूप से समृद्ध देश भी ईवीएम को छोड़कर दोबारा बैलेट पेपर (मतपत्र) की पुरानी और सुरक्षित व्यवस्था पर वापस लौट चुके हैं, तो भारत को भी इस दिशा में गंभीरता से सोचना चाहिए।
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