बंगाल विधानसभा में ‘विपक्ष के नेता’ को लेकर घमासान: अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षर वाला पत्र खारिज

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता (Leader of Opposition) के चयन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विधानसभा सचिवालय ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) द्वारा भेजे गए उस पत्र को खारिज कर दिया है, जिस पर पार्टी महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षर थे। इस घटनाक्रम के बाद अब तृणमूल विधायक सोहनदेव चट्टोपाध्याय ने सूचना का अधिकार (RTI) के जरिए विधानसभा के नियमों पर सवाल उठाए हैं।

विवाद की जड़: क्या है पूरा मामला?

तृणमूल कांग्रेस ने विधानसभा सचिवालय को एक पत्र सौंपकर सोहनदेव चट्टोपाध्याय को विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता देने की मांग की थी। इस पत्र के साथ ही फिरहाद हाकिम को चीफ व्हिप और नयन बंदोपाध्याय व आशिमा पात्रा को उपनेता नामित किया गया था।

विवाद तब शुरू हुआ जब विधानसभा सचिवालय ने इस पत्र को मानने से इनकार कर दिया। सचिवालय का तर्क है कि:

  • पत्र पर अभिषेक बनर्जी के हस्ताक्षर मान्य नहीं हैं, क्योंकि वे सांसद हैं और तृणमूल विधायक दल में उनका कोई औपचारिक पद नहीं है।

  • सचिवालय ने मांग की है कि 80 विधायकों के समर्थन वाला हस्ताक्षरयुक्त पत्र पेश किया जाए।

  • नियमों के अनुसार, विधायकों को एक आंतरिक बैठक में अपना नेता चुनना चाहिए, जिसके नतीजों का ब्योरा सचिवालय में जमा होना चाहिए।

सोहनदेव चट्टोपाध्याय का रुख और RTI

इस विरोध से नाराज विधायक सोहनदेव चट्टोपाध्याय ने अब RTI दाखिल की है। उनका कहना है कि विपक्ष के नेता के चयन की प्रक्रिया इतनी जटिल पहले कभी नहीं थी। उन्होंने कहा, ‘आमतौर पर विधानसभा का सचिवालय सीधे पुष्टि कर देता है, लेकिन इस बार प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से रोका जा रहा है।’ अपनी RTI में उन्होंने 2011, 2016 और 2021 के विधानसभा सत्रों के दौरान विपक्ष के नेता के चयन के लिए अपनाए गए नियमों की जानकारी मांगी है।

सत्ता पक्ष और सचिवालय की कड़ी टिप्पणी

सचिवालय और ट्रेजरी बेंच के सूत्रों ने अभिषेक बनर्जी के हस्तक्षेप पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। एक सदस्य ने स्पष्ट कहा, “सांसद होने के नाते अभिषेक बनर्जी का विधायक दल के आंतरिक मामलों में पत्र जारी करना तर्कसंगत नहीं है।” इसके अलावा, विपक्ष के नेता के लिए आवंटित दफ्तर पर ताला लगा होने से भी सियासी सरगर्मी बढ़ गई है।

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या तृणमूल कांग्रेस सचिवालय द्वारा मांगी गई 80 विधायकों के समर्थन की शर्त को पूरा करेगी या यह मामला कानूनी मोड़ लेगा।

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