नई दिल्ली | बाजार में इन दिनों तरबूज की भरमार है और गर्मी की आहट देखते ही लोग इसे बड़े चाव से घर ला रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि मार्च के आखिरी दिनों और अप्रैल की शुरुआत में तरबूज खाना आपकी सेहत बिगाड़ सकता है? आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों ही इस समय तरबूज खाने को लेकर आगाह करते हैं। योगाचार्य उमंग के अनुसार, तरबूज खाने का एक निश्चित समय और ऋतु होती है, जिसकी अनदेखी शरीर पर भारी पड़ सकती है।
आयुर्वेद के अनुसार क्यों है मनाही?
आयुर्वेद में तरबूज को ‘शीतल’ (ठंडी तासीर वाला) और ‘गुरु’ (पचाने में भारी) माना गया है। मार्च-अप्रैल के महीने में मौसम पूरी तरह गर्म नहीं हुआ होता है, ऐसे में तरबूज खाने से शरीर में कई समस्याएं हो सकती हैं:
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‘आम’ का बनना: खाली पेट या बेमौसम तरबूज खाने से शरीर में ‘आम’ (विषाक्त पदार्थ) बनता है। इससे सुस्ती, थकान और शरीर में भारीपन महसूस होता है।
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पाचन तंत्र पर दबाव: इस मौसम में हमारा शरीर अभी अत्यधिक ठंडे और भारी फलों को पचाने के लिए तैयार नहीं होता, जिससे डाइजेशन खराब हो सकता है।
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तासीर का मेल: जब तक ‘ज्येष्ठ’ का महीना (मई का आधा समय) न बीत जाए, तब तक तरबूज का पूरा लाभ नहीं मिलता।
साइंस की चेतावनी: डायबिटीज रोगी रहें सावधान
केवल आयुर्वेद ही नहीं, विज्ञान भी तरबूज के सेवन को लेकर सतर्क रहने की सलाह देता है। तरबूज का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) लगभग 72-80 के बीच होता है, जो काफी उच्च है।
चेतावनी: उच्च GI के कारण तरबूज खाने से ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है। इसलिए डायबिटीज के मरीजों को इसे अपनी डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए।
तरबूज खाने के 3 ‘गोल्डन रूल्स’ (गर्मियों के लिए)
अगर आप तरबूज का असली फायदा उठाना चाहते हैं, तो इन तीन नियमों का पालन जरूर करें:
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सही समय (11 AM – 5 PM): तरबूज हमेशा सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे के बीच ही खाएं। इस समय शरीर की ‘जठराग्नि’ (पाचन शक्ति) तेज होती है, जिससे यह आसानी से पच जाता है।
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अकेले खाएं (No Mixing): तरबूज को हमेशा अकेला ही खाना चाहिए। इसे दूध, दही, अन्य फलों या भारी भोजन के साथ मिलाकर खाना जहर के समान हो सकता है।
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ऋतु का चुनाव: तरबूज ग्रीष्म ऋतु का फल है। इसे तभी खाएं जब गर्मी अपने चरम पर हो, यानी मई के मध्य के बाद।
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