बरेली में आंधी-बारिश का हाहाकार! 14 घंटे से ठप है बिजली-पानी, पूरे जिले में ‘ब्लैकआउट’ जैसी स्थिति

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में बुधवार रात आए भीषण आंधी और तूफान ने भारी तबाही मचाई है। पिछले कई दिनों से रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और उमस से जूझ रहे बरेली वासियों को मौसम के इस बदले मिजाज से तपिश से राहत तो मिली, लेकिन आंधी की रफ्तार इतनी भयावह थी कि इसने पूरे शहर और ग्रामीण इलाकों की बुनियादी व्यवस्था को तहस-नहस कर दिया।

जिले के अधिकांश इलाकों में पिछले 14 घंटों से बिजली पूरी तरह गुल है, जिसके कारण अब लोगों के सामने पानी का गंभीर संकट (Water Scarcity) खड़ा हो गया है। करीब 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली चक्रवाती आंधी के कारण जिले भर में सैकड़ों पेड़, भारी-भरकम यूनीपोल और बिजली के पोल उखड़कर हाईटेंशन लाइनों पर गिर गए। हालात इतने खराब हैं कि बिजली विभाग और प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद अगले 24 घंटों में भी व्यवस्था पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद नहीं दिख रही है।

85 किमी/घंटा की रफ्तार से चली हवा, ट्रांसमिशन से ही बंद करनी पड़ी सप्लाई

बुधवार दिन में बरेली का अधिकतम तापमान 40.3 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 27.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। शाम होते-होते मौसम ने अचानक करवट ली। आसमान में घने काले बादल छा गए और देखते ही देखते 85 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी रफ्तार से धूल भरी आंधी चलने लगी।

आंधी की भयावहता को देखते हुए बिजली विभाग ने एहतियातन शहर से लेकर देहात तक की मुख्य विद्युत आपूर्ति को सीधे ट्रांसमिशन (मुख्य ग्रिड) से ही बंद कर दिया। करीब आधे घंटे की भीषण आंधी के बाद तेज बारिश और गरज-चमक का सिलसिला शुरू हुआ, जिससे पूरा जिला अंधेरे के आगोश में समा गया। शहर के सभी 26 बिजली उपकेंद्रों (Substations) में पूरी रात सन्नाटा पसरा रहा।

पांच दर्जन से अधिक पेड़ लाइनों पर गिरे, टूट गए ट्रांसफार्मर

बारिश थमने के बाद जब बिजली विभाग की टीमों ने पेट्रोलिंग (गश्त) शुरू की, तो तबाही का मंजर देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। 33 केवी (KV) और 11 केवी की मुख्य सप्लाई लाइनों पर पांच दर्जन से अधिक बड़े पेड़ और उनकी टहनियां गिरी हुई थीं। कई जगहों पर बिजली के खंभे बीच से टूट गए, तो कुछ इलाकों में भारी-भरकम ट्रांसफार्मर पोल समेत जमीन पर आ गिरे।

देर रात बारिश जारी रहने के कारण करंट उतरने के डर से बिजली कर्मचारी खंभों पर चढ़ने से बचते रहे, जिससे मरम्मत का काम समय पर शुरू नहीं हो सका। दोहना, बालीपुर और सीबीगंज ट्रांसमिशन से जुड़े इलाकों में फॉल्ट खोजने और उन्हें दुरुस्त करने के लिए टीमें लगातार जुटी हुई हैं।

शहर के इन प्रमुख इलाकों में सबसे ज्यादा हाहाकार

शहर के अलग-अलग हिस्सों में तकनीकी गड़बड़ियों के कारण दिन में भी लोग बिजली-पानी के लिए तरसते रहे:

  • सुभाष नगर: यहाँ मुख्य बंच केबल (Bunch Cable) के बुरी तरह जल जाने के कारण उमस भरी गर्मी में लोगों का जीना मुहाल हो गया।

  • कोहड़ापीर: गांधीनगर फीडर का डीओ (DO) उड़ने के कारण बड़े इलाके की बत्ती गुल रही।

  • हरुनगला: सरस्वती विहार इलाके में एलटी (LT) लाइन का मुख्य तार टूटने से आपूर्ति बाधित हुई।

  • रामगंगा नगर: रामवैली के पास भी बंच केबल फुंकने से बिजली संकट गहरा गया।

पूरी रात और दिन में बिजली न आने के कारण घरों और सोसायटियों में लगे इन्वर्टर पूरी तरह डिस्चार्ज हो चुके हैं। पानी की टंकियां खाली होने की वजह से लोग सुबह से ही पानी की बूंद-बूंद के लिए परेशान हैं और बिजली उपकेंद्रों (पावर हाउस) पर लगातार फोन कर रहे हैं, जहां अक्सर लाइनें व्यस्त मिल रही हैं।

पड़ोसी जिलों शाहजहाँपुर और पीलीभीत का भी बुरा हाल

आंधी-तूफान का यह कहर सिर्फ बरेली तक सीमित नहीं रहा। रोहिलखंड और आस-पास के अन्य जिलों जैसे शाहजहाँपुर, पीलीभीत, बदायूं और लखीमपुर खीरी में भी जगह-जगह पेड़ गिरने और पोल टूटने के कारण कई ब्लॉक और तहसील स्तर के इलाके पूरी तरह ब्लैकआउट का सामना कर रहे हैं।

प्रशासन की अपील: पुलिस, जिला प्रशासन, बिजली विभाग और अग्निशमन (Fire Brigade) की टीमें सड़कों से पेड़ हटाने और तारों को जोड़ने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही हैं। बिजली विभाग और जिला प्रशासन ने आम जनता से धैर्य बनाए रखने और बिजली बहाली के काम में सहयोग करने की अपील की है।

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