
ओटावा/नई दिल्ली: कनाडा और भारत के बीच लंबे समय से चली आ रही कूटनीतिक तनातनी के बीच एक बेहद चौंकाने वाला और राहत भरा मोड़ आया है। कनाडा की राष्ट्रीय पुलिस सेवा, रॉयल केंटियन माउंटेड पुलिस (RCMP) के कमिश्नर माइक डूहमे ने एक आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि वर्तमान में कनाडा की धरती पर भारत से जुड़ी कोई भी खुफिया या ‘अंतरराष्ट्रीय दमनकारी’ गतिविधि नहीं चल रही है। कमिश्नर का यह बयान उन दावों के बिल्कुल विपरीत है जो पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल के दौरान लगातार चर्चा में रहे थे।
पूर्व पीएम जस्टिन ट्रूडो के आरोपों पर लगा विराम
जस्टिन ट्रूडो के शासनकाल में कनाडा ने भारत पर कई गंभीर आरोप लगाए थे, जिससे दोनों देशों के ऐतिहासिक रिश्तों में कड़वाहट आ गई थी। ट्रूडो सरकार ने भारतीय एजेंसियों पर कनाडा के भीतर हस्तक्षेप करने के दावे किए थे, जिन्हें भारत ने हमेशा ‘बेतुका और राजनीति से प्रेरित’ बताकर खारिज किया। अब RCMP कमिश्नर माइक डूहमे की इस स्वीकारोक्ति ने ट्रूडो के उन पुराने आरोपों की हवा निकाल दी है। सुरक्षा एजेंसियों की इस क्लिन चिट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बड़ी नैतिक जीत के रूप में देखा जा रहा है।
पीएम मार्क कार्नी की कूटनीति का असर
कनाडा में सत्ता परिवर्तन और प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के पद संभालने के बाद से ही भारत के साथ रिश्तों को पटरी पर लाने की कोशिशें तेज हो गई थीं। पीएम कार्नी ने कूटनीतिक सुधारों पर जोर देते हुए द्विपक्षीय संबंधों को व्यापार और सुरक्षा के नजरिए से फिर से परिभाषित किया है। कनाडाई प्रशासन अब पुराने विवादों को पीछे छोड़कर नए सिरे से सहयोग की राह तलाश रहा है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मार्क कार्नी की संतुलित विदेश नीति का ही परिणाम है कि अब सुरक्षा एजेंसियां भी तथ्यों के आधार पर पारदर्शी बयान जारी कर रही हैं।
भविष्य की संभावनाओं और रिश्तों में नई गर्माहट
RCMP की इस रिपोर्ट के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि भारत और कनाडा के बीच वीजा सेवाओं, व्यापारिक समझौतों और छात्रों के आदान-प्रदान में आई रुकावटें अब दूर होंगी। भारत ने हमेशा इस बात पर जोर दिया है कि वह किसी भी देश की संप्रभुता का सम्मान करता है। कनाडा की शीर्ष पुलिस संस्था की इस स्पष्टता के बाद अब दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय वार्ता का रास्ता साफ हो गया है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की मुलाकात संभव है, जो दक्षिण एशिया और उत्तरी अमेरिका के बीच एक नए रणनीतिक अध्याय की शुरुआत कर सकती है।
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