‘उन्होंने डींगें हांकीं और हमने हमला किया’ अमेरिका ने बताया ईरान पर भीषण प्रहार का असली कारण; 11 परमाणु बमों का था खतरा

वॉशिंगटन/नई दिल्ली |अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हालिया हवाई हमलों ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। इन हमलों के पीछे के कारणों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच अमेरिकी राजनयिक स्टीव विटकॉफ ने एक बड़ा खुलासा किया है। विटकॉफ के अनुसार, ईरान न केवल गुप्त तरीके से परमाणु हथियार विकसित कर रहा था, बल्कि उसने अमेरिकी अधिकारियों के सामने इस बात की ‘डींगें’ भी हांकी थीं कि वह 11 परमाणु बम बनाने की क्षमता हासिल कर चुका है। इसी खतरे को भांपते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु ठिकानों को ‘बीच रास्ते’ में ही ध्वस्त करने का आदेश दिया।

460 किग्रा परमाणु ईंधन और 11 बमों का दावा

स्टीव विटकॉफ ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में बताया कि जिनेवा में हुई बातचीत के दौरान ईरानी वार्ताकारों का रवैया बेहद आक्रामक और उकसाने वाला था।

  • नियमों की अनदेखी: ईरान ने अंतरराष्ट्रीय निगरानी प्रोटोकॉल से बचकर गुपचुप तरीके से 460 किलोग्राम यूरेनियम जमा कर लिया था।

  • 60% एनरिचमेंट: ईरान ने गर्व से दावा किया कि उसने इस ईंधन को 60 प्रतिशत तक एनरिच (संवर्धित) कर लिया है। विटकॉफ के मुताबिक, यह मात्रा 11 न्यूक्लियर बम बनाने के लिए पर्याप्त है।

अमेरिका की 3 शर्तें जिन्हें ईरान ने ठुकराया

राजनयिक विटकॉफ ने स्पष्ट किया कि अमेरिका इस युद्ध को टालना चाहता था, लेकिन उसने ईरान के सामने तीन प्रमुख शर्तें रखी थीं:

  1. परमाणु और मिसाइल प्रोग्राम: तेहरान को अपना परमाणु कार्यक्रम और बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण पूरी तरह बंद करना होगा।

  2. प्रॉक्सी संगठनों पर लगाम: हिजबुल्लाह और हमास जैसे सैन्य समूहों को वित्तीय और हथियारों की मदद देना बंद करना।

  3. नौसैनिक शक्ति का अंत: समुद्र में अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ईरान को अपनी नौसैनिक आक्रामकता कम करनी होगी।

ईरानी प्रतिनिधियों ने इन शर्तों को मानने के बजाय साफ कह दिया कि वे हथियारों के लिए यूरेनियम संवर्धन जारी रखेंगे। इसी अडिग रवैये के बाद वार्ता विफल हो गई।

‘बीच रास्ते में रोकने का अधिकार’— ट्रंप का कड़ा संदेश

विटकॉफ ने बताया कि जब ईरान ने परमाणु बमों की धमकी दी, तो राष्ट्रपति ट्रंप ने सख्त लहजे में जवाब दिया। ट्रंप का मानना था कि अगर कोई देश वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बन रहा है, तो अमेरिका के पास उसे ‘बीच रास्ते में रोकने’ का पूरा अधिकार है। ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ ने राष्ट्रपति को पहले ही आगाह कर दिया था कि ईरान के साथ कूटनीतिक समझौता करना लगभग नामुमकिन है, क्योंकि उनकी नीयत हथियारों की होड़ कम करने की नहीं थी।

निष्कर्ष: परमाणु ठिकानों पर सर्जिकल स्ट्राइक

विटकॉफ के इस बयान से यह साफ हो गया है कि अमेरिका और इजरायल के साझा हमले का प्राथमिक लक्ष्य ईरान की परमाणु क्षमता को जड़ से खत्म करना था। अमेरिका का मानना है कि खामेनेई के नेतृत्व में ईरान परमाणु क्लब में शामिल होने के बेहद करीब पहुंच गया था, जो इजरायल और खाड़ी देशों के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा था। फिलहाल, इन हमलों के बाद ईरान के कई महत्वपूर्ण परमाणु और सैन्य ठिकाने मलबे में तब्दील हो चुके हैं।

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