भारत की किस्मत बदलने आ रहा है यह महाअभियान! गहरे समंदर में छिपे तेल-गैस के कुबेर भंडार को खोजेगी मोदी सरकार

पश्चिम एशिया और मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एक बेहद साहसिक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कड़ा पहरा बिठाए जाने के बाद से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और एलपीजी गैस की आपूर्ति बुरी तरह लड़खड़ा गई है। इस संकट का सीधा असर भारत पर भी पड़ रहा है। इसी बीच, केंद्र सरकार ने देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने और विदेशी निर्भरता को खत्म करने के लिए समुद्र की अगाध गहराइयों में छिपे काले सोने (क्रूड ऑयल) और प्राकृतिक गैस के भंडारों को खंगालने का फैसला किया है।

एक प्रतिष्ठित मीडिया रिपोर्ट में सरकारी दस्तावेजों के हवाले से बड़ा खुलासा किया गया है कि भारत सरकार का हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (DGH) बंगाल की खाड़ी सहित देश के पूर्वी तट पर एक व्यापक और बेहद आधुनिक बहु-बेसिन भूगर्भीय सर्वेक्षण शुरू करने जा रहा है। इस महा-सर्वेक्षण के लिए सरकार की तरफ से टेंडर भी आमंत्रित कर दिए गए हैं, जो भारत के ऊर्जा इतिहास में एक नया अध्याय लिखेगा।

आधुनिक तकनीक से होगा समुद्र तल का ‘एक्स-रे’

इस पूरे प्रोजेक्ट को तकनीकी भाषा में ‘2D ब्रॉडबैंड मरीन सीस्मिक एंड ग्रेविटी-मैग्नेटिक डेटा एक्विजिशन, प्रोसेसिंग एंड इंटरप्रिटेशन’ कहा जाता है। अगर इसे बहुत ही आसान शब्दों में समझें, तो यह आधुनिक तकनीक के जरिए समुद्र की सतह के नीचे का एक विशाल अंडरग्राउंड स्कैन या एक्स-रे है। इस हाई-टेक अभियान के तहत विशेष रूप से तैयार किए गए सर्वेक्षण जहाज समुद्र में उतरेंगे। ये जहाज अपने पीछे लंबे केबल जैसे अत्याधुनिक उपकरणों को खींचेंगे, जिन्हें ‘स्ट्रीमर्स’ कहा जाता है। ये उपकरण समुद्र के सीने को चीरते हुए नीचे बेहद शक्तिशाली ध्वनि तरंगें (साउंड वेव्स) भेजेंगे। जब ये तरंगें समुद्र के नीचे मौजूद विभिन्न चट्टानों से टकराकर वापस लौटेंगी, तो उनकी गूंज को रिकॉर्ड कर लिया जाएगा। इस डेटा का बारीकी से अध्ययन करके वैज्ञानिक समुद्र तल के कई किलोमीटर नीचे की थ्री-डी और विस्तृत तस्वीरें तैयार करेंगे, जिससे यह सटीक पता चल सकेगा कि तेल और गैस के विशाल भंडार कहां छुपे हैं।

2 साल तक चलेगा लाखों किलोमीटर का यह मेगा मिशन

भारत सरकार का यह मिशन कितना विशाल है, इसका अंदाजा आप इसके दायरे से लगा सकते हैं। अगले दो वर्षों तक अनवरत चलने वाले इस अभियान के तहत देश के पूर्वी समुद्री तटों को पूरी तरह खंगाल डाला जाएगा। तय योजना के मुताबिक, बंगाल-पूर्णिया और महानदी बेसिन के 45,000 लाइन किलोमीटर (LKM) क्षेत्र में यह सर्वे चलाया जाएगा। इसके अलावा, सामरिक रूप से महत्वपूर्ण अंडमान बेसिन में 43,000 एलकेएम, पहले से ही समृद्ध कृष्णा-गोदावरी (KG) बेसिन में 43,000 एलकेएम और कावेरी बेसिन के 30,000 एलकेएम के विशाल समुद्री दायरे में यह आधुनिक खोज की जाएगी।

विदेशी निर्भरता और महंगाई पर लगेगी लगाम

वर्तमान में भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल और भारी मात्रा में प्राकृतिक गैस दूसरे देशों से आयात करता है। यही वजह है कि जब भी मिडिल ईस्ट या दुनिया के किसी भी कोने में युद्ध या भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम आसमान छूने लगते हैं। इसका सीधा असर भारत के आम नागरिकों की जेब, घरेलू बजट, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और चौतरफा महंगाई के रूप में देखने को मिलता है। विशेषज्ञों और सरकारी अधिकारियों का मानना है कि मुंबई हाई जैसे पश्चिमी तटों की तुलना में भारत का पूर्वी समुद्री तट अब भी काफी हद तक अनछुआ है। इस नए और आधुनिक सीस्मिक सर्वे के जरिए भारत अपनी इसी कमजोरी को ताकत में बदलना चाहता है ताकि भविष्य में किसी भी वैश्विक संकट का असर देश की अर्थव्यवस्था पर न पड़े।

इन 5 समुद्री खजानों पर टिकी है देश की उम्मीदें

इस महाअभियान के तहत मुख्य रूप से पांच क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जहां वैज्ञानिकों को भारी सफलता मिलने की उम्मीद है:

  • बंगाल अपतटीय बेसिन: सरकारी दस्तावेजों के मुताबिक, इस क्षेत्र में 10 किलोमीटर से भी ज्यादा मोटी तलछटी परतें मौजूद हैं। यहाँ प्राचीन इओसीन युग से लेकर नए भूगर्भीय काल तक के हाइड्रोकार्बन के मजबूत स्रोत होने की संभावना है। यहाँ पहले भी कई स्तरों पर गैस मिलने के शुरुआती संकेत मिल चुके हैं।

  • महानदी बेसिन: विशेषज्ञ इस क्षेत्र को व्यावसायिक उत्पादन के लिहाज से बेहद हाई-पोटेंशियल वाला मान रहे हैं। यहाँ क्रेटेशियस काल से लेकर प्लियोसीन काल तक के गहरे पानी के प्राकृतिक जलाशय और सक्रिय बायोगैस सिस्टम मौजूद हैं।

  • अंडमान बेसिन: भूवैज्ञानिकों का मानना है कि म्यांमार और इंडोनेशिया के समृद्ध गैस क्षेत्रों से भौगोलिक समानता होने के कारण अंडमान के नीचे गैस का असीमित भंडार छिपा हो सकता है। यहाँ समुद्र के नीचे जमे हुए मीथेन के विशाल हाइड्रोकार्बन भंडार (गैस हाइड्रेट्स) भी मौजूद हैं, जिन्हें भविष्य का सबसे बड़ा ऊर्जा स्रोत माना जा रहा है।

  • कृष्णा-गोदावरी (KG) बेसिन: यह क्षेत्र पहले से ही भारत का एक स्थापित और प्रमुख गैस उत्पादक केंद्र है। हालांकि, नए वैज्ञानिक आकलनों से पता चला है कि इसके अत्यंत गहरे समुद्री हिस्सों में अभी भी भारी मात्रा में ऐसे अनदेखे भंडार हैं, जिन्हें अब तक छुआ भी नहीं जा सका है।

  • कावेरी बेसिन: यह भी एक प्रमाणित और पेट्रोलीफेरस बेसिन है। वैज्ञानिकों का दृढ़ विश्वास है कि इसके जुरासिक काल के पत्थरों और गहरे अपतटीय क्षेत्रों में तेल-गैस की बड़ी खोज होनी बाकी है।

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