TMC Internal Crisis: ‘BJP आक्रामक है, हमें दबंग TMC चाहिए’; बागी हुए मदन मित्रा, ममता बनर्जी के नेतृत्व पर उठाए तीखे सवाल

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली शिकस्त के बाद सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) में आंतरिक कलह और गुटबाजी चरम पर पहुंच गई है। टीएमसी प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले कद्दावर नेता मदन मित्रा ने पार्टी के खिलाफ बगावती तेवर अख्तियार कर लिए हैं।

शुक्रवार 17 जुलाई 2026 को मदन मित्रा ने पार्टी के मौजूदा सांगठनिक ढांचे और नेतृत्व शैली पर तीखा हमला बोला। कामरहाटी से विधायक मित्रा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिस ढर्रे पर अभी पार्टी चल रही है, उससे भारतीय जनता पार्टी (BJP) जैसी आक्रामक पार्टी का मुकाबला नहीं किया जा सकता।

“कालीघाट के तरीके से नहीं जीती जा सकती BJP से जंग”

कोलकाता में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मदन मित्रा ने ममता बनर्जी के आधिकारिक आवास ‘कालीघाट’ की कार्यप्रणाली पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा:

“कालीघाट से वर्तमान में जिस तरह से तृणमूल कांग्रेस चलाई जा रही है, उससे भाजपा के खिलाफ लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती। भाजपा एक बेहद आक्रामक पार्टी है और उसका मुकाबला करने के लिए हमें एक दबंग और उतनी ही आक्रामक तृणमूल कांग्रेस की जरूरत है। हालात ये हैं कि शाम छह बजे क्या होने वाला है, इसकी जानकारी पौने छह बजे तक भी कालीघाट स्थित शीर्ष नेतृत्व को नहीं होती। हम सिर्फ पार्टी को सही रास्ता दिखाने का प्रयास कर रहे हैं।”

सभी सांगठनिक पदों और मुख्य सचेतक पद से दिया इस्तीफा

बगावती तेवरों के बीच मदन मित्रा ने संगठन में बड़े बदलाव के संकेत देते हुए बड़े इस्तीफों की घोषणा कर दी:

  • पदों का त्याग: मित्रा ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी की सभी राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय संगठनात्मक समितियों से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है।

  • सदन में छोड़ा पद: इसके अतिरिक्त, उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक (Chief Whip) के पद से भी इस्तीफा दे दिया है।

  • मित्रा की सफाई: हालांकि, उन्होंने साफ किया कि वे अभी भी टीएमसी के ही सदस्य हैं। बागी नेता ऋतब्रत बनर्जी से मुलाकात के बाद उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा, “मैंने केवल अपना कमरा बदला है, अपना मकान नहीं। मैं अभी भी तृणमूल कांग्रेस का ही हिस्सा हूं।”

केंद्रीय जांच एजेंसियों के समन पर दोटूक

केंद्रीय जांच एजेंसियों (ED/CBI) द्वारा उनके परिवार को समन भेजे जाने के सवाल पर मदन मित्रा ने बेहद बेबाक अंदाज में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अगर उनकी पत्नी और बेटे को जांच एजेंसियों ने पूछताछ के लिए बुलाया है, तो वे निश्चित रूप से जाएंगे। अगर उन्होंने कोई भी गलत काम किया होगा, तो एजेंसियां कानून के तहत अपना काम करेंगी। उन्होंने जोर देकर कहा, “मुझे किसी भी जांच या कार्रवाई से कोई डर नहीं है।”

21 जुलाई ‘शहीद दिवस’ के स्थान पर विवाद

टीएमसी के सबसे बड़े वार्षिक कार्यक्रम ’21 जुलाई शहीद दिवस’ को लेकर भी मित्रा ने अलग राह चुनी है। उन्होंने कहा कि इस बार यह कार्यक्रम विक्टोरिया या अन्य जगहों के बजाय गांधी प्रतिमा के सामने आयोजित होना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि ऐतिहासिक गोलीकांड के दिन वे स्वयं मौके पर मौजूद थे और वही वास्तविक शहीद स्थल है, इसलिए सभी सच्चे तृणमूल कार्यकर्ताओं को गांधी प्रतिमा के सामने ही जुटना चाहिए।

ऋतब्रत बनर्जी के ‘बागी गुट’ में शामिल, कोयल मलिक के इस्तीफे की चर्चा

मदन मित्रा अब आधिकारिक तौर पर राज्यसभा सांसद ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले टीएमसी के बागी धड़े में शामिल हो गए हैं। पिछले कुछ महीनों से इस गुट ने ममता बनर्जी के नेतृत्व को लगातार सीधी चुनौती दी है और एक समानांतर (Parallel) संगठन खड़ा कर लिया है।

इस बीच, प्रसिद्ध अभिनेत्री और टीएमसी की राज्यसभा सांसद रुक्मिणी मलिक उर्फ कोयल मलिक के भी इस्तीफे की अटकलें तेज हैं। इस पर टिप्पणी करते हुए मित्रा ने केवल इतना कहा कि कोयल एक स्वतंत्र नागरिक हैं और वे किसी से भी मिलने के लिए स्वतंत्र हैं। मदन मित्रा के इस कदम के बाद बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बनने की उम्मीद जताई जा रही है।

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