
सनातन धर्म की काल गणना में पंचांग का विशेष महत्व है, जो तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के समन्वय से दैनिक ऊर्जा और शुभ-अशुभ समय का सटीक विवरण प्रदान करता है। आज 2 सितंबर को भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि है। आज का दिन समस्त माताओं के लिए अत्यंत पावन और फलदायी है, क्योंकि आज संतान के सुदीर्घ जीवन, उत्तम स्वास्थ्य और संकटों से रक्षा के लिए रखा जाने वाला प्रसिद्ध ‘हरछठ’ यानी ‘हलषष्ठी’ (ललही छठ) का व्रत पूरे विधि-विधान से मनाया जा रहा है। आज ही के दिन भगवान श्रीकृष्ण के ज्येष्ठ भ्राता और शेषनाग के अवतार भगवान श्री बलराम जी का जन्मोत्सव भी है।
उत्तर प्रदेश के लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर और बुंदेलखंड समेत दिल्ली-एनसीआर, बिहार और मध्य प्रदेश के समस्त अंचलों में आज हरछठ की विशेष रौनक देखने को मिल रही है। महिलाएं अपनी संतानों के कल्याण के लिए निर्जला व फलाहार उपवास रखकर महुआ, पलाश और पसही के चावल से पूजन कर रही हैं। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान और व्रत की पूजा तभी पूर्ण फलित होती है जब उसे पंचांग अनुसार शुभ वेला में संपन्न किया जाए। इसलिए आज के दिन राहुकाल का त्याग करते हुए शुभ चौघड़िया और अभिजीत मुहूर्त का चयन करना शास्त्रों के अनुसार परम आवश्यक बताया गया है।
2 सितंबर का संपूर्ण पंचांग: तिथि, नक्षत्र और ग्रहों की स्थिति
वैदिक पंचांग के अनुसार आज भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि का प्रभाव पूरे दिन रहेगा। षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान कार्तिकेय हैं, जो साहस, सुरक्षा और आरोग्यता के प्रतीक हैं। आज के दिन नक्षत्र और ग्रहों का संचरण अत्यंत अनुकूल बना हुआ है, जो पूजा-पाठ, दान-पुण्य और साधना के लिए उत्तम ऊर्जा का निर्माण कर रहा है।
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तिथि: भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि (सायंकाल तक, इसके पश्चात सप्तमी तिथि का प्रारंभ)।
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वार: बुधवार।
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पक्ष: कृष्ण पक्ष।
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मास: भाद्रपद (पूर्णिमांत) / श्रावण (अमांत)।
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संवत: विक्रम संवत 2083, शक संवत 1948।
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सूर्योदय: प्रातः 06 बजकर 01 मिनट।
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सूर्यास्त: सायं 06 बजकर 41 मिनट।
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चंद्रोदय: रात्रि 10 बजकर 22 मिनट।
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चंद्रास्त: अगले दिन पूर्वाह्न 11 बजकर 15 मिनट।
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चंद्र राशि: वृषभ राशि में चंद्रमा का संचार रहेगा, जो मानसिक शांति और स्थिरता का कारक माना जाता है।
हरछठ पूजा के सर्वश्रेष्ठ शुभ मुहूर्त: अभिजीत और अमृत काल
हरछठ व्रत की पूजा दोपहर और सायंकाल के संधिकाल में करने की विशेष परंपरा है। महिलाएं सामूहिक रूप से महुआ और कांस के पौधों की स्थापना कर गड्ढे (बावड़ी) के समक्ष कथा सुनती हैं। पंचांग के अनुसार आज पूजा और शुभ कार्यों के संपादन के लिए कई श्रेष्ठ मुहूर्त उपलब्ध हो रहे हैं।
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अभिजीत मुहूर्त: पूर्वाह्न 11 बजकर 55 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक। अभिजीत मुहूर्त को दिन का सबसे शक्तिशाली मुहूर्त माना जाता है, जिसमें किए गए किसी भी पूजन या संकल्प में निश्चित सफलता प्राप्त होती है।
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विजय मुहूर्त: दोपहर 02 बजकर 27 मिनट से दोपहर 03 बजकर 18 मिनट तक। यह समय शत्रुओं पर विजय और पारिवारिक संकटों के निवारण हेतु प्रार्थना करने के लिए सर्वोत्तम है।
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गोधूलि मुहूर्त: सायं 06 बजकर 39 मिनट से सायं 07 बजकर 02 मिनट तक। हरछठ के दिन सांझ ढले गोधूलि वेला में की जाने वाली आरती और पसही के चावल का अर्घ्य संतान के जीवन से अकाल मृत्यु का भय दूर करता है।
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अमृत काल: सायं 04 बजकर 12 मिनट से सायं 05 बजकर 48 मिनट तक। इस अवधि में हरछठ माता की पौराणिक कथा का श्रवण करना और बच्चों को आशीर्वाद देना अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है।
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निशीथ काल: रात्रि 11 बजकर 58 मिनट से देर रात 12 बजकर 43 मिनट तक (साधना और मंत्र जाप हेतु)।
राहुकाल और अशुभ समय: इस दौरान भूलकर भी न करें पूजन
वैदिक ज्योतिष में राहुकाल को अशुभ और विघ्नकारी काल माना गया है। इस दौरान कोई भी नया कार्य, शुभ संकल्प, व्रत का मुख्य पूजन या मांगलिक अनुष्ठान प्रारंभ नहीं करना चाहिए। राहु के प्रभाव में शुरू किए गए कार्यों में अड़चनें आने की संभावना रहती है।
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राहुकाल: दोपहर 12 बजकर 21 मिनट से दोपहर 01 बजकर 56 मिनट तक। व्रती माताओं को विशेष ध्यान रखना चाहिए कि इस डेढ़ घंटे की अवधि में मुख्य पूजा, हवन या कथा का पाठ प्रारंभ न करें। यदि पूजा पहले से चल रही हो तो उसे जारी रखा जा सकता है, किंतु नया संकल्प राहुकाल में न लें।
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यमगण्ड: प्रातः 07 बजकर 36 मिनट से पूर्वाह्न 09 बजकर 11 मिनट तक।
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गुलिक काल: पूर्वाह्न 10 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 21 मिनट तक।
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दुर्मुहूर्त: पूर्वाह्न 11 बजकर 55 मिनट से दोपहर 12 बजकर 46 मिनट तक।
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दिशा शूल: आज उत्तर दिशा में दिशा शूल रहेगा। यदि आज किसी आवश्यक कार्य से उत्तर दिशा की यात्रा करनी पड़े, तो घर से निकलने से पहले थोड़ा सा गुड़ या तिल खाकर और भगवान गणेश का स्मरण करके ही प्रस्थान करें।
आज का शुभ चौघड़िया: जानें दिनभर के लाभ और अमृत के पल
सनातन परंपरा में किसी भी व्रत का पारण, पूजा की तैयारी या यात्रा के लिए चौघड़िया मुहूर्त का विचार अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। आज दिन के समय चर, लाभ और अमृत के चौघड़िया में पूजन सामग्री जुटाना और हरछठ का मंडप सजाना विशेष शुभ रहेगा।
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लाभ चौघड़िया (उन्नति कारक): प्रातः 06 बजकर 01 मिनट से प्रातः 07 बजकर 36 मिनट तक।
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अमृत चौघड़िया (सर्वोत्तम): प्रातः 07 बजकर 36 मिनट से पूर्वाह्न 09 बजकर 11 मिनट तक।
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शुभ चौघड़िया (कल्याणकारी): पूर्वाह्न 10 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 21 मिनट तक।
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चर चौघड़िया (सामान्य शुभ): दोपहर 03 बजकर 31 मिनट से सायं 05 बजकर 06 मिनट तक।
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लाभ चौघड़िया (सायंकालीन): सायं 05 बजकर 06 मिनट से सायं 06 बजकर 41 मिनट तक।
हरछठ व्रत की पूजा विधि और पंचांग अनुसार विशेष सावधानियां
हरछठ व्रत के नियम अन्य सामान्य व्रतों से काफी अलग और कड़े माने जाते हैं। इस दिन धरती पर हल चलाने और हल से जोतकर पैदा किए गए किसी भी प्रकार के अन्न या फल का सेवन पूर्ण रूप से वर्जित होता है। आज के दिन महिलाएं केवल वही खाद्य सामग्री ग्रहण करती हैं जो प्राकृतिक रूप से स्वतः उगती है, जैसे तालाब का पसही (तिन्नी) का चावल, महुआ, करौंदा और बिना जुताई वाली हरी सब्जियां।
पंचांग के नियमों के अनुसार आज गाय के दूध, दही या घी का स्पर्श और सेवन भी पूरी तरह निषिद्ध रहता है। इस व्रत में केवल भैंस के दूध और उससे बने घी-दही का ही प्रयोग किया जाता है। पूजा के लिए घर के आंगन या स्वच्छ स्थान पर छोटा तालाब बनाकर उसमें पलाश (ढाक), महुआ और कांस की डालियां गाड़ी जाती हैं। इसके पश्चात भगवान बलराम और हरछठ माता का आह्वान कर कथा सुनी जाती है।
पूजा के उपरांत माताएं अपने पुत्रों की पीठ पर हल्दी या ऐपन से छह छापे लगाती हैं और उन्हें महुआ व भुने हुए अनाजों का प्रसाद देती हैं। सायंकाल अमृत या लाभ के चौघड़िया में पूजा संपन्न करने के बाद पसही के चावल और महुआ का फलाहार करके ही व्रत का विधान पूरा किया जाता है। आज के दिन बताए गए शुभ मुहूर्त में निष्ठापूर्वक पूजन करने से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है और बच्चों पर आने वाली सभी प्रकार की व्याधियां और अनिष्टकारी ग्रह योग शांत होते हैं।
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