वाशिंगटन/दुबई: मिडिल ईस्ट के समुद्री जलमार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में जारी भीषण तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को शुरू किए गए अपने महत्वाकांक्षी सैन्य अभियान ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ को रोकने का अचानक ऐलान कर दिया है। ट्रंप के इस फैसले ने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है, क्योंकि कुछ ही घंटों पहले अमेरिका ने वहां 15,000 सैनिकों और मिसाइल तैनात करने की बात कही थी।
क्यों रोका गया ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’?
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि ईरान के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत में “शानदार प्रगति” हुई है। ट्रंप के अनुसार:
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समझौते की उम्मीद: ईरान के साथ एक फाइनल डील की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए गए हैं।
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वैश्विक अनुरोध: पाकिस्तान और अन्य देशों के अनुरोध के बाद अमेरिका ने सैन्य अभियान को फिलहाल रोकने का निर्णय लिया।
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शांति की परीक्षा: ट्रंप ने साफ किया कि यह ऑपरेशन केवल यह देखने के लिए रोका गया है कि ईरान शांति समझौते पर हस्ताक्षर करता है या नहीं।
क्या था प्रोजेक्ट फ्रीडम और क्यों बढ़ा तनाव?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में युद्ध के कारण 87 देशों के लगभग 23,000 नाविक और सैकड़ों जहाज फंस गए थे। इन्हें सुरक्षित बाहर निकालने के लिए ट्रंप ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ लॉन्च किया था।
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सैन्य शक्ति: इसमें 100 से अधिक विमान, ड्रोन प्लेटफॉर्म और गाइडेड मिसाइल तैनात की गई थीं।
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ईरान की जवाबी कार्रवाई: ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया और जवाबी कार्रवाई करते हुए UAE के तेल ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान की इस सख्त चेतावनी और तेल संकट के खतरे को देखते हुए अमेरिका को अपनी रणनीति बदलनी पड़ी है।
नाकाबंदी जारी, पर रेस्क्यू रुका
भले ही ट्रंप ने जहाजों को बाहर निकालने का ऑपरेशन रोक दिया है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी नाकाबंदी (Blockade) जारी रहेगी। यानी अमेरिका अभी भी होर्मुज के आसपास अपनी सैन्य पकड़ ढीली नहीं करेगा। यह ईरान पर दबाव बनाए रखने की एक सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है।
चीन की शरण में ईरान?
इस तनावपूर्ण माहौल के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची चीन की यात्रा पर जा रहे हैं।
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कूटनीतिक समर्थन: जानकारों का मानना है कि ईरान अमेरिका और इजरायल के खिलाफ चीन का समर्थन जुटाना चाहता है।
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चीन का रुख: 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से चीन ने संतुलित रुख अपनाया है। हालांकि उसने अमेरिकी हमलों की निंदा की थी, लेकिन वह सीधे तौर पर इस युद्ध में कूदने से बच रहा है।
अगले कुछ दिन यह तय करेंगे कि ट्रंप का यह ‘बैकस्टेप’ एक बड़ी शांति संधि की प्रस्तावना है या फिर आने वाले किसी बड़े तूफान से पहले की शांति।
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