पाक-अफगान सीमा पर ‘अघोषित युद्ध’: अलकायदा के बड़े चेहरों की मौजूदगी ने सुलगाई आग, क्या भीषण टकराव की ओर हैं दोनों देश…

काबुल/इस्लामाबाद। दक्षिण एशिया के दो पड़ोसी मुल्कों, अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच संबंध अब उस मुकाम पर पहुँच गए हैं जहाँ से वापसी की राहें बेहद कठिन नजर आ रही हैं। सीमाई इलाकों में दोनों देशों की सेनाओं के बीच जारी भारी गोलाबारी और हिंसक झड़पों ने एक ‘अघोषित युद्ध’ जैसी स्थिति पैदा कर दी है। तनाव की यह चिंगारी अब एक बड़े विस्फोट में बदल सकती है, क्योंकि अफगान सरजमीं पर अलकायदा के खूंखार आतंकियों की सक्रियता ने इस विवाद में ‘घी का काम’ किया है।

डूरंड लाइन पर बरस रहे गोले: सीमा पर तनाव चरम पर

पिछले कुछ समय से पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमाओं पर शांति पूरी तरह भंग हो चुकी है। दोनों तरफ की सेनाएं एक-दूसरे के ठिकानों को निशाना बनाकर भारी हथियारों का इस्तेमाल कर रही हैं। इन हिंसक झड़पों में न केवल सैनिकों बल्कि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले नागरिकों को भी अपनी जान गंवानी पड़ रही है। पाकिस्तान का आरोप है कि उसकी सीमा में घुसपैठ हो रही है, जबकि तालिबान शासित अफगानिस्तान अब पाकिस्तानी सेना की धमकियों को नजरअंदाज कर ईंट का जवाब पत्थर से दे रहा है।

अलकायदा के बड़े चेहरों की मौजूदगी: आतंक का नया केंद्र?

इस अघोषित युद्ध के पीछे की सबसे भयावह सच्चाई अफगानिस्तान में अलकायदा के बड़े चेहरों की मौजूदगी बताई जा रही है। खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, अफगानिस्तान की धरती पर अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन अलकायदा के शीर्ष कमांडरों ने फिर से अपनी जड़ें जमानी शुरू कर दी हैं। पाकिस्तान के लिए यह स्थिति गले की फांस बन गई है, क्योंकि एक तरफ वह आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक दबाव झेल रहा है और दूसरी तरफ उसके अपने ही आंगन में आतंक की नई नर्सरी पनप रही है। अलकायदा की इस मौजूदगी ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच जारी कड़वाहट को और ज्यादा तीखा कर दिया है।

कूटनीति विफल या बड़े युद्ध की आहट?

जानकारों का मानना है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत के सारे रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं। तालिबान के सत्ता में आने के बाद से ही सीमा विवाद (डूरंड लाइन) को लेकर खींचतान जारी थी, लेकिन अलकायदा के तत्वों का इस विवाद में जुड़ना अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के लिए भी चिंता का विषय है। यदि दोनों देशों के बीच यह हिंसक झड़पें इसी तरह जारी रहीं, तो यह न केवल क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बनेगा, बल्कि वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ जारी जंग को भी बड़ा झटका दे सकता है।

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