UP Assembly Special Session 2026: उत्तर प्रदेश विधानमंडल के एक दिवसीय विशेष सत्र की शुरुआत हंगामेदार रही। सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। सीएम योगी ने महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के विरोध को लेकर विपक्षी दलों के इतिहास की याद दिलाते हुए कहा कि सपा और कांग्रेस की “रग-रग में नारी का अपमान” भरा हुआ है।
मुख्यमंत्री ने उस दौर का जिक्र किया जब प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर एक नारा बेहद चर्चित था— “देख सपाई, बिटिया घबराई”। उन्होंने कहा कि आज का विशेष सत्र विपक्ष के इसी ‘महिला विरोधी’ चरित्र को बेनकाब करने के लिए बुलाया गया है।
विपक्ष के खिलाफ ‘निंदा प्रस्ताव’ की तैयारी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि यह सत्र सपा और INDI गठबंधन के उन प्रयासों के खिलाफ है, जिन्होंने महिला आरक्षण संशोधन को लागू होने से रोकने की कोशिश की।
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नैतिक साहस की चुनौती: सीएम ने कहा, “अगर सपा और कांग्रेस में नैतिक साहस है, तो वे चर्चा में भाग लें और बताएं कि उन्होंने इस ऐतिहासिक विधेयक का विरोध क्यों किया? या तो वे अपने नेताओं की गलती के लिए माफी मांगें, वरना सदन उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करेगा।”
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शाहबानो केस का जिक्र: सीएम योगी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि शाहबानो केस से लेकर अब तक, कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं के सशक्तिकरण के मार्ग में बाधाएं उत्पन्न की हैं।
सपा का पलटवार: पोस्टर और तख्तियों के साथ प्रदर्शन
वहीं दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी ने भी सरकार के हमलों का जवाब देने के लिए आक्रामक रुख अपनाया। सपा विधायक हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर विधानसभा पहुंचे।
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आरक्षण लागू करने की मांग: सपा विधायकों ने सदन के बाहर प्रदर्शन करते हुए मांग की कि 33% महिला आरक्षण को तुरंत लागू किया जाए।
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बीजेपी पर आरोप: विपक्ष ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी महिला आरक्षण के नाम पर केवल ‘नाटक’ कर रही है और वास्तव में इसे लागू करने की उसकी कोई मंशा नहीं है।
सदन में ‘नारी गरिमा’ पर आर-पार
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जहाँ नारी गरिमा और स्वावलंबन को प्राथमिकता दी जा रही है, वहीं विपक्ष केवल अवरोध पैदा करने की राजनीति कर रहा है। आज के इस विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल का विरोध करने वाले दलों के खिलाफ आधिकारिक तौर पर निंदा प्रस्ताव लाया जाना है, जिससे सदन के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के आसार हैं।
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