UP Politics: ‘ईरान से डील का कोई दबाव नहीं’, पाकिस्तान में शांति वार्ता से पहले ट्रंप के तेवर कड़े

वॉशिंगटन/इस्लामाबाद। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ होने वाली शांति वार्ता से ठीक पहले स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी तरह के दबाव में नहीं हैं। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने वाले दूसरे दौर की बातचीत से पहले ट्रंप ने विरोधियों को करारा जवाब देते हुए कहा कि समझौता उनकी शर्तों पर होगा और यह ओबामा काल की डील से कहीं बेहतर होगा।

“फेक न्यूज और विपक्ष की साजिश”

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर उन मीडिया रिपोर्ट्स को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि अमेरिकी फाइटर जेट गिराए जाने के बाद ट्रंप चिंता में हैं और जल्दबाजी में समझौता करना चाहते हैं। ट्रंप ने लिखा, “मुझ पर ईरान के साथ डील करने का कोई दबाव नहीं है। यह सब फेक न्यूज है। हालांकि, चीजें बहुत तेजी से आगे बढ़ रही हैं और जल्द ही एक बड़ा परिणाम सामने आएगा।”

डेमोक्रेटिक पार्टी पर बरसे ट्रंप

ट्रंप ने अमेरिकी विपक्षी दल (डेमोक्रेटिक पार्टी) पर निशाना साधते हुए कहा कि वे युद्ध के समय देश को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने अपनी तुलना इतिहास के बड़े युद्धों से करते हुए कहा कि यह संघर्ष विश्व युद्ध, कोरियाई और वियतनाम युद्ध की तुलना में बहुत जल्दी निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपतियों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि उनमें इस मुद्दे को सुलझाने के लिए “साहस और दूरदर्शिता” की कमी थी।

ईरान की आर्थिक कमर तोड़ने का दावा

ट्रंप ने अपनी रणनीति साफ करते हुए कहा कि जब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो जाता, तब तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर लगाया गया अमेरिकी ब्लॉकेड (नाकेबंदी) नहीं हटेगा। ट्रंप के अनुसार:

  • इस ब्लॉकेड से तेहरान को रोजाना करीब 500 बिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है।

  • ईरान की अर्थव्यवस्था इस घाटे को सहने की स्थिति में नहीं है और वह बर्बादी की कगार पर है।

“ईरान में हो चुका है रिजीम चेंज”

रिजीम चेंज (सत्ता परिवर्तन) के वादे पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य शक्ति अब शून्य हो चुकी है। उन्होंने कहा, “ईरान की नेवी खत्म हो चुकी है, एयर डिफेंस बर्बाद है और उनके पास अब सुरक्षा के नाम पर कुछ नहीं बचा। उनके पुराने नेता भी जा चुके हैं, इसे ही रिजीम चेंज कहा जाता है।”

बता दें कि 28 फरवरी को तेहरान पर हमले के बाद ट्रंप ने वहां की जनता से विद्रोह की अपील की थी। अब जबकि मंगलवार को पाकिस्तान में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल मिलने वाले हैं, पूरी दुनिया की नजरें इस महा-समझौते पर टिकी हैं।

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