लखनऊ/जौनपुर: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जौनपुर की चर्चा तेज हो गई है। पूर्व सांसद बाहुबली धनंजय सिंह की पत्नी और जौनपुर की जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीकला रेड्डी ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की है। मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस भेंट के दौरान धनंजय सिंह के करीबी एमएलसी बृजेश सिंह प्रिंसू भी मौजूद रहे। लोकसभा चुनाव 2026 के बाद हुई इस मुलाकात को सियासी गलियारों में काफी अहम माना जा रहा है।
मुलाकात की टाइमिंग है खास
यह मुलाकात इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव में श्रीकला रेड्डी को बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने जौनपुर से उम्मीदवार बनाया था। लेकिन ऐन वक्त पर श्रीकला ने अपना नामांकन वापस लेकर सबको चौंका दिया था। उस वक्त भी इसे भाजपा की पर्दे के पीछे की रणनीति का हिस्सा माना गया था। चुनाव खत्म होने के बाद अब मुख्यमंत्री से उनकी सीधी मुलाकात किसी नए राजनीतिक समीकरण की ओर इशारा कर रही है।
क्या चर्चा हुई?
आधिकारिक तौर पर इस मुलाकात को लेकर निम्नलिखित बातें सामने आ रही हैं:
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विकास कार्यों पर चर्चा: श्रीकला रेड्डी ने जौनपुर जिले की विकास परियोजनाओं और जिला पंचायत के कार्यों को लेकर मुख्यमंत्री को अवगत कराया।
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जिले की समस्याएं: उन्होंने जौनपुर की कुछ प्रमुख स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए शासन से सहयोग मांगा।
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आश्वासन: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विकास कार्यों में तेजी लाने और जनहित के मुद्दों पर सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया है।
सियासी जानकारों का क्या है कहना?
राजनीतिक विश्लेषक इस शिष्टाचार भेंट को महज विकास तक सीमित नहीं देख रहे हैं। इसके पीछे कई बड़े संकेत छिपे हो सकते हैं:
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भाजपा से बढ़ती नजदीकियां: लोकसभा चुनाव के दौरान जिस तरह से श्रीकला ने बसपा का साथ छोड़ा, उसके बाद से ही धनंजय सिंह के परिवार का झुकाव भाजपा की ओर माना जा रहा है।
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पूर्वांचल का समीकरण: धनंजय सिंह का पूर्वांचल की कई सीटों पर मजबूत आधार है। भाजपा आने वाले समय में इस प्रभाव का लाभ उठाने की कोशिश कर सकती है।
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पुरानी तल्खी का अंत: चुनाव के दौरान प्रशासन और धनंजय सिंह के बीच जो तल्खी दिखी थी, यह मुलाकात उसे कम करने और भविष्य के ‘गठजोड़’ के तौर पर देखी जा रही है।
विपक्ष की नजर
विपक्षी दल (सपा और कांग्रेस) भी इस हलचल पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। जौनपुर की दोनों सीटों (जौनपुर और मछलीशहर) पर फिलहाल समाजवादी पार्टी का कब्जा है। ऐसे में भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव और भविष्य के उपचुनावों के लिए अपनी जमीन मजबूत करने के लिए धनंजय सिंह और श्रीकला रेड्डी के साथ समन्वय बढ़ाने की रणनीति पर काम कर सकती है।
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