वाशिंगटन/तेहरान: मध्य पूर्व और वैश्विक कूटनीति के लिहाज से एक बेहद ऐतिहासिक और युगांतकारी घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिका और इस्लामी गणराज्य ईरान के बीच पिछले कई महीनों से चले आ रहे भीषण सैन्य संघर्ष और कूटनीतिक गतिरोध का आखिरकार अंत हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन (मसूद पेशमर्गा) ने दोनों देशों के बीच शांति बहाल करने के लिए औपचारिक रूप से एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।
अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, दोनों राष्ट्रपतियों के दस्तखत के साथ ही यह ऐतिहासिक शांति समझौता तत्काल प्रभाव से पूरी दुनिया में लागू हो गया है।
वर्साय पैलेस में डिनर के दौरान ट्रंप ने किए ‘हार्ड कॉपी’ पर साइन
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस की अपनी यात्रा के दौरान वर्साय पैलेस (Palace of Versailles) में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के साथ आयोजित एक विशेष रात्रिभोज (डिनर) के दौरान इस अमेरिका-ईरान समझौते की आधिकारिक ‘हार्ड कॉपी’ पर हस्ताक्षर किए। वर्साय में हस्ताक्षर होने के तुरंत बाद इस मूल दस्तावेज़ की प्रमाणित प्रतियां ईरान और इस पूरी वार्ता में मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभा रहे देशों को भेज दी गईं।
इससे पहले, बीते रविवार को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे. डी. वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर ग़ालिबफ़ ने डिजिटल माध्यम से इस समझौता ज्ञापन पर इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर किए थे। अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि इस हस्ताक्षरित दस्तावेज़ के साथ ही दोनों देशों के बीच लगभग चार महीने से चला आ रहा खतरनाक सैन्य गतिरोध पूरी तरह समाप्त हो गया है।
जिनेवा में नहीं होगा कोई समारोह; वार्ता का प्रस्ताव अभी भी बरकरार
इस समझौते के बाद स्विट्जरलैंड के जिनेवा में होने वाले किसी भव्य हस्ताक्षर समारोह की अटकलें पूरी तरह समाप्त हो गई हैं। दोनों देशों की वार्ताकार टीमें आगामी शुक्रवार को जिनेवा में एक बैठक कर सकती हैं, लेकिन ईरानी अधिकारियों ने साफ किया है कि स्विट्जरलैंड में होने वाली इस बैठक का उद्देश्य किसी नए समझौते पर हस्ताक्षर करना नहीं है।
चूंकि मुख्य दस्तावेज़ पर पहले ही डिजिटल और भौतिक रूप से हस्ताक्षर किए जा चुके हैं, इसलिए अब स्विट्जरलैंड में कोई प्रत्यक्ष हस्ताक्षर समारोह (Signing Ceremony) आयोजित नहीं किया जाएगा। अगले कुछ घंटों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि शुक्रवार की यह समीक्षा बैठक आयोजित होगी या नहीं।
ईरान को तेल निर्यात और फंसी संपत्ति पर मिली बड़ी रियायत
समझौते की मुख्य शर्तों और ईरान की मांगों को लेकर ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समझौते के तहत:
-
स्वतंत्र तेल व्यापार: तेहरान (ईरान) को अब बिना किसी अंतरराष्ट्रीय परिवहन, बैंकिंग या बीमा प्रतिबंधों के अपना कच्चा तेल दुनिया भर में बेचने की पूर्ण अनुमति होगी।
-
राजस्व पर पूरा अधिकार: ईरान को अपने तेल के निर्यात से प्राप्त होने वाले पूरे राजस्व (कमाई) का सीधे और स्वतंत्र रूप से उपयोग करने का अधिकार मिल गया है।
-
फ्रीज संपत्तियों की बहाली: इसके अतिरिक्त, अमेरिका ने दुनिया भर में फ्रीज (प्रतिबंधित) की गई ईरान की सभी चल-अचल संपत्तियों और वित्तीय कोषों तक तेहरान की पहुंच में आने वाली सभी बाधाओं को तुरंत दूर करने की कड़क प्रतिबद्धता जताई है।
अंतिम स्थायी समझौते के लिए 60 दिनों का ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’
इस प्रारंभिक समझौते (ढांचे) के लागू होने के साथ ही दोनों महाशक्तियों के बीच 60 दिनों की एक आधिकारिक वार्ता अवधि शुरू हो गई है। आपसी सहमति बनने पर इस समय-सीमा को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।
ईरान सरकार का कहना है कि दोनों देशों को अगले 60 दिनों तक पूरी तरह संयम बरतना चाहिए और किसी भी ऐसी राजनीतिक, आर्थिक या सैन्य कार्रवाई से बचना चाहिए जिससे इस शांति समझौते के कार्यान्वयन (Implementation) और दोनों पक्षों के आपसी विश्वास पर कोई नकारात्मक प्रभाव पड़े। नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि स्विट्जरलैंड और अन्य मंचों पर होने वाली आगामी कूटनीतिक बातचीत ही यह तय करेगी कि क्या यह प्रारंभिक ढांचा एक पूर्ण, व्यापक और स्थायी शांति समझौते में परिवर्तित हो पाएगा या नहीं। इस 60 दिनों की अवधि में अंतिम समझौते के बारीक विवरणों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया