वॉशिंगटन/नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बेहद सनसनीखेज दावा किया है। ट्रंप के मुताबिक, गुरुवार (11 जून 2026) की रात सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘होर्मुज स्ट्रेट’ (Strait of Hormuz) के पास ईरान ने भारतीय जहाजों को निशाना बनाकर ड्रोन हमला करने की कोशिश की थी, जिसे अमेरिकी सेना ने मुस्तैदी से नाकाम कर दिया। इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान पर दोनों देशों के बीच चल रहे संभावित शांति समझौते की शर्तों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अफवाहें और झूठ फैलाने का गंभीर आरोप लगाया है।
‘ट्रुथ सोशल’ पर ट्रंप का फूटा गुस्सा: ईरान को कहा ‘बेईमान’
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक के बाद एक कई पोस्ट लिखकर ईरान को जमकर लताड़ लगाई। ट्रंप ने ईरानी मीडिया के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें कहा जा रहा था कि अमेरिका घुटने टेकने को तैयार है। ट्रंप ने लिखा:
“ईरान ने फेक न्यूज (मीडिया) को जो शर्तें बताई हैं, उनका हमारे बीच होने वाले शांति समझौते की वास्तविक शर्तों से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है। ईरान की तरफ से जो कुछ भी प्रचारित किया जा रहा है, उसका सच्चाई से कोई वास्ता नहीं है। डील करने के मामले में ये बेहद ही बेईमान लोग हैं।”
दरअसल, यह तीखी प्रतिक्रिया ईरानी मीडिया की उन रिपोर्ट्स के बाद आई है, जिनमें दावा किया गया था कि इस्लामिक सरकार की सख्त शर्तों के आगे बाइडन-ट्रंप नीतियों को झुकना पड़ा है और अमेरिका उनकी ज्यादातर मांगें मानने के लिए तैयार हो गया है।
होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय जहाजों को किसने बचाया?
समझौते पर ईरान की घेराबंदी करने के साथ ही ट्रंप ने एक बड़ा खुलासा करते हुए भारत से जुड़े घटनाक्रम का जिक्र किया। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर भारतीय व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाने की नापाक कोशिश की थी।
ट्रंप ने पोस्ट में आगे लिखा, “यह बेहद कमाल की बात है कि कल रात होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे भारतीय जहाजों पर भी उनकी (ईरान) तरफ से ड्रोन हमले की कोशिश की गई थी। लेकिन हमारी चौकस सेना ने इसे समय रहते नाकाम कर दिया। ईरान की यह हरकत बिलकुल भी मंजूर करने लायक नहीं है। उन्हें जल्द से जल्द अपनी इन हरकतों को सुधार लेना चाहिए, वरना अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहें।”
हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने इस बयान में यह साफ नहीं किया कि वे कौन से भारतीय जहाज थे या वे किस प्रकार के कार्गो लेकर जा रहे थे। इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक न तो ईरान ने ट्रंप के दावों पर कोई प्रतिक्रिया दी है और न ही भारत सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है।
अमेरिकी हमले में 3 भारतीय नाविकों की मौत से पहले ही उबला है देश
डोनाल्ड ट्रंप का यह सुरक्षात्मक दावा ऐसे नाजुक समय में आया है, जब कुछ ही दिन पहले अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में तीन भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत हो चुकी है। गौरतलब है कि 8 जून को पलाऊ के झंडे वाले एक तेल टैंकर को अमेरिकी सेना ने संदिग्ध मानकर निशाना बनाया था। इस टैंकर के क्रू मेंबर्स में 24 भारतीय नागरिक शामिल थे, जिनमें से 21 को बचा लिया गया लेकिन 3 भारतीयों की जान चली गई थी। इसके अलावा, गिनी बसाऊ के झंडे वाले ‘जालवीर’ नामक जहाज पर भी अमेरिकी नौसेना ने हमला किया था, जिस पर 20 भारतीय नाविक सवार थे।
भारत ने अमेरिकी राजदूत को किया तलब, देश में सियासी घमासान
इन लगातार होते हमलों के बीच भारत सरकार ने सख्त कूटनीतिक रुख अपनाते हुए नई दिल्ली में तैनात अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत जेसन मीक्स को विदेश मंत्रालय तलब किया था। भारत सरकार ने अपने नागरिकों की मौत को लेकर अमेरिका के सामने बेहद कड़ा विरोध दर्ज कराया है।
दूसरी तरफ, देश के भीतर इस मुद्दे पर सियासत चरम पर है। इस तनावपूर्ण माहौल के बीच डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लगातार 12 वर्षों तक सत्ता में रहने (या राजनीति में प्रभावी रहने) की बधाई देना और पीएम मोदी द्वारा सार्वजनिक रूप से ट्रंप को धन्यवाद कहना विपक्ष को रास नहीं आ रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई बड़े नेताओं ने सरकार की विदेश नीति को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा है कि एक तरफ हमारे नाविक मारे जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ सरकार इतनी नरमी क्यों दिखा रही है?
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