West Asia Crisis: ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत पर भारत की ‘खामोशी’ के क्या हैं मायने? खाड़ी देशों के साथ बदलती कूटनीति का पूरा विश्लेषण

नई दिल्ली | पश्चिम एशिया (West Asia) इस समय बारूद के ढेर पर बैठा है। अमेरिका और इजरायल के ईरान पर भीषण हमलों और ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत ने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है। लेकिन इस महासंकट के बीच भारत की कूटनीति ने विशेषज्ञों को चौंका दिया है। खामेनेई की मौत के 48 घंटे बाद भी भारत की ‘चुप्पी’ और उसी दौरान खाड़ी देशों (सऊदी, यूएई) के साथ पीएम मोदी का ‘सक्रिय संवाद’ एक बड़े रणनीतिक बदलाव की ओर इशारा कर रहा है। आइए समझते हैं कि भारत की नई ‘प्रैक्टिकल कूटनीति’ क्या है।

ईरान पर चुप्पी और खाड़ी से करीबी: क्या संतुलन बदल गया है?

ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत पर जहां कई देशों ने तुरंत प्रतिक्रिया दी, वहीं भारत ने अभी तक आधिकारिक शोक या बयान जारी नहीं किया है। इसके विपरीत, पीएम नरेंद्र मोदी ने तत्काल यूएई, सऊदी अरब, बहरीन और इजरायल के शीर्ष नेताओं से फोन पर बात की।

  • सामरिक प्राथमिकता: विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, कूटनीति अब भावनात्मक नहीं बल्कि सामरिक (Strategic) हो गई है।

  • नागरिकों का हित: ईरान में केवल 8-10 हजार भारतीय हैं, जबकि यूएई, सऊदी और कतर जैसे देशों में 1 करोड़ के करीब भारतीय रहते हैं। ईरान द्वारा इन देशों पर किए गए हमलों ने भारत की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि वहां रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा सर्वोपरि है।

ईरान से क्यों बढ़ रही है दूरियां?

कभी भारत का प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता रहा ईरान अब भारत की प्राथमिकता सूची में पीछे खिसकता दिख रहा है। इसके पीछे कई बड़े कारण हैं:

  1. अमेरिकी प्रतिबंध: अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते भारतीय कंपनियों को ईरान के तेल और गैस क्षेत्रों से अपना निवेश हटाना पड़ा।

  2. तेल व्यापार: वर्ष 2019 के बाद से भारत ने ईरान से तेल की खरीद लगभग बंद कर दी है।

  3. चाबहार पोर्ट का भविष्य: कभी भारत-ईरान दोस्ती का प्रतीक माने जाने वाले चाबहार पोर्ट के लिए भारत ने अपने ताजा बजट (2026-27) में कोई वित्तीय प्रावधान नहीं किया है, जो एक बड़ा संकेत है।

‘ट्रिपल-A’ देशों (Arab, America, Aryavarta) की नई धुरी

पूर्व राजनयिकों का मानना है कि पिछले 6-7 वर्षों में भारत का झुकाव इजरायल और खाड़ी देशों की ओर बहुत तेजी से बढ़ा है। आंकड़ों से इसे समझा जा सकता है:

  • पीएम की यात्राएं: 2016 के बाद से कोई भी भारतीय पीएम ईरान नहीं गया है। इसके मुकाबले पीएम मोदी 7 बार यूएई और 3 बार सऊदी अरब की यात्रा कर चुके हैं।

  • रणनीतिक साझेदारी: यूएई के साथ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) और इजरायल के साथ विशेष सैन्य व तकनीकी गठबंधन भारत की नई दिशा तय कर रहे हैं।

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