वाइट हाउस की ‘सीक्रेट रूम’ मीटिंग बेनतीजा: डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच फंसा पेच, परमाणु डील और होर्मुज स्ट्रेट पर बरकरार है गतिरोध

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ शांति समझौते को लेकर की गई उच्चस्तरीय ‘सीक्रेट रूम’ बैठक के बावजूद कोई ठोस परिणाम नहीं निकल सका है। वाइट हाउस में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ लगभग दो घंटे तक चली मैराथन बैठक के बाद भी अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया है।

क्या हुआ सीक्रेट रूम मीटिंग में?

ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, राष्ट्रपति केवल उसी समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार हैं जो उनकी कड़ी शर्तों को पूरा करे। ट्रंप की प्राथमिकताएं स्पष्ट हैं:

  • परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर अंकुश: ईरान को परमाणु हथियार या बम बनाने से पूरी तरह रोकना।

  • होर्मुज स्ट्रेट की बहाली: अंतरराष्ट्रीय नौवहन (Shipping) के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोलना और वहां बिछाई गई सभी समुद्री बारूदी सुरंगों (Naval Mines) को हटाना।

ईरान का अड़ियल रुख: ‘शब्दों पर नहीं, कार्रवाई पर भरोसा’

दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी शर्तों के आगे झुकने से इनकार कर दिया है। ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बघेर कालिबाफ ने साफ तौर पर कहा कि उन्हें वाशिंगटन के शब्दों पर भरोसा नहीं है। उन्होंने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर अपनी प्रतिक्रिया में लिखा, “अगर दूसरा पक्ष कार्रवाई नहीं करेगा, तो ईरान भी कोई कदम नहीं उठाएगा। हम बातचीत से नहीं, बल्कि अपनी सामरिक शक्ति से रियायतें हासिल करते हैं।”

ईरान की ओर से कुछ प्रमुख मांगें भी रखी गई हैं, जो इस समझौते को और जटिल बना रही हैं:

  • युद्धविराम का दायरा: ईरान चाहता है कि किसी भी समझौते में इजराइल और हिजबुल्ला के बीच युद्धविराम को शामिल किया जाए।

  • फंड की रिहाई: विदेशों में फ्रीज किए गए ईरान के अरबों डॉलर के फंड को जारी करना।

  • शर्तों का टकराव: ईरानी संसद की समिति के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने दो टूक शब्दों में कहा है कि समझौता ‘नकद के बदले नकद’ और ‘लाभ के बदले लाभ’ के आधार पर ही होगा, मुफ्त में कुछ भी स्वीकार्य नहीं है।

शांति की राह में बड़ी चुनौतियां

भले ही वाइट हाउस में प्रारंभिक समझौते की चर्चाएं थीं, लेकिन ईरान ने इसे ‘अंतिम रूप नहीं ले पाने वाला’ करार दिया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने संकेत दिए थे कि वार्ताकार एक व्यापक सहमति बनाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन ईरान फिलहाल केवल युद्ध को समाप्त करने पर केंद्रित है, परमाणु कार्यक्रम के विवरण पर चर्चा के लिए अभी तैयार नहीं है।

अब स्थिति यह है कि अमेरिका परमाणु कार्यक्रम पर अंकुश चाहता है, जबकि ईरान अपनी संप्रभुता और आर्थिक लाभों पर अड़ा हुआ है। दोनों देशों के बीच बढ़ा हुआ अविश्वास और इजराइल-हिजबुल्ला संघर्ष की छाया ने इस शांति प्रक्रिया को बेहद नाजुक मोड़ पर ला खड़ा किया है।

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