नई दिल्ली/लखनऊ: पश्चिम बंगाल चुनाव की सरगर्मी के बीच एक बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आई है। यूपी कैडर के कद्दावर आईएएस अधिकारी अनुराग यादव को चुनाव आयोग ने पर्यवेक्षक (Observer) के पद से तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। बताया जा रहा है कि दिल्ली में आयोजित एक वर्चुअल समीक्षा बैठक के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और आईएएस अनुराग यादव के बीच जबरदस्त बहस हो गई। यह विवाद इतना बढ़ गया कि आयोग ने उन्हें न केवल ड्यूटी से मुक्त किया, बल्कि उन्हें वापस भेजने का भी कड़ा निर्देश दे दिया।
एक सवाल का जवाब न देना पड़ा भारी
सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा घटनाक्रम कूच बिहार दक्षिण विधानसभा क्षेत्र की समीक्षा के दौरान हुआ। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पर्यवेक्षक अनुराग यादव से उनके क्षेत्र के पोलिंग बूथों की सटीक संख्या और बुनियादी जानकारी मांगी थी। आईएएस अनुराग यादव इस सवाल का तत्काल उत्तर नहीं दे पाए, जिसे आयोग ने अपनी जिम्मेदारी के प्रति लापरवाही माना। जब मुख्य चुनाव आयुक्त ने इस पर नाराजगी जाहिर की, तो दोनों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। अनुशासन को सर्वोपरि रखने वाले चुनाव आयोग ने इसे गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई कर दी।
कौन हैं आईएएस अनुराग यादव?
अनुराग यादव उत्तर प्रदेश कैडर के साल 2000 बैच के बेहद वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। वर्तमान में वह यूपी के समाज कल्याण विभाग में प्रमुख सचिव के महत्वपूर्ण पद पर तैनात हैं। इससे पहले वह आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग जैसे कई अहम विभागों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। प्रशासनिक हलकों में उन्हें एक सुलझा हुआ अधिकारी माना जाता रहा है, लेकिन चुनाव आयोग के साथ हुए इस विवाद ने उनके करियर पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
विभागीय जांच और भविष्य पर मंडराता खतरा
चुनाव आयोग के इस कड़े रुख के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार भी एक्शन में आ सकती है। आयोग के पत्र के आधार पर राज्य सरकार उनसे लिखित स्पष्टीकरण मांग सकती है। जानकारों का कहना है कि यदि उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो उनके खिलाफ विभागीय जांच भी बैठाई जा सकती है। इतना ही नहीं, चुनाव आयोग उन्हें भविष्य में कभी भी चुनावी ड्यूटी न देने का फैसला भी कर सकता है।
IAS अभिषेक सिंह के उस चर्चित मामले की आई याद
यह पहली बार नहीं है जब यूपी के किसी आईएएस अधिकारी को पर्यवेक्षक पद से हटाया गया हो। इससे पहले 2011 बैच के आईएएस अभिषेक सिंह को 2022 के गुजरात चुनाव के दौरान वापस भेज दिया गया था। अभिषेक सिंह ने सरकारी गाड़ी के साथ अपनी फोटो सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी, जिसे आयोग ने पद की गरिमा के खिलाफ माना था। संयोग देखिए कि अभिषेक सिंह ने बाद में अपनी सेवा से इस्तीफा दे दिया था, और अब अनुराग यादव का यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
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