कौन हैं ‘लाखन आर्मी’ के चीफ सूरज पासी? जानिए उनके संघर्ष और संगठन के बारे में

लखनऊ के मलिहाबाद में मस्जिद-किला विवाद के केंद्र में ‘लाखन आर्मी’ और उसके मुखिया सूरज पासी का नाम चर्चा में है। सूरज पासी ने पासी समाज के गौरवशाली इतिहास को पुनर्जीवित करने और युवाओं को संगठित करने का बीड़ा उठाया है। आइए जानते हैं कि कौन हैं सूरज पासी और क्या है उनकी ‘लाखन आर्मी’।

बेहद संघर्षपूर्ण रहा है सूरज पासी का जीवन

सूरज पासी का जन्म 1998 में लखनऊ के बख्शी का तालाब क्षेत्र के भोलापुर गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था। मात्र 17 वर्ष की अल्पायु में उनके सिर से पिता का साया उठ गया, जिसके बाद परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। इस कठिन दौर में उन्होंने न केवल परिवार को संभाला, बल्कि पासी समाज के इतिहास का गहराई से अध्ययन भी किया। उन्होंने महसूस किया कि उनके पूर्वजों का शासनकाल बेहद वैभवशाली रहा है, लेकिन वर्तमान में समाज मुख्यधारा से काफी पीछे है।

‘लाखन एकता मिशन’ और ‘लाखन आर्मी’ का गठन

अपने समाज के युवाओं में चेतना जगाने के उद्देश्य से 27 फरवरी 2023 को सूरज पासी ने ‘लाखन एकता मिशन’ की स्थापना की, जिसे जनमानस में ‘लाखन आर्मी’ के नाम से जाना जाता है।

संगठन के मुख्य स्तंभ:

  • Gen Z युवाओं का जुड़ाव: यह संगठन मुख्य रूप से युवाओं (Gen Z) पर केंद्रित है।

  • नशा मुक्ति: लाखन आर्मी से जुड़ने की प्राथमिक शर्त ‘नशा मुक्ति’ है। युवाओं को शराब और अन्य मादक पदार्थों से दूर रखने की शपथ दिलाई जाती है।

  • सामाजिक सुधार: संगठन का उद्देश्य आत्मगौरव, शिक्षा, आर्थिक मजबूती और कुरीतियों का खात्मा करना है।

  • विस्तार: वर्तमान में यूपी के करीब 30 जिलों के अलावा बिहार और उत्तराखंड तक इस संगठन का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है।

यूपी की राजनीति में पासी समाज का प्रभाव

सूरज पासी का यह आंदोलन केवल एक धार्मिक स्थल के दावे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी सामाजिक-राजनीतिक चेतना भी है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में पासी समाज एक बहुत बड़ा फैक्टर है:

  • दलित आबादी में अहम स्थान: दलित समाज में जाटव समुदाय के बाद पासी समाज दूसरी सबसे बड़ी आबादी है (लगभग 16% दलित आबादी का हिस्सा)।

  • चुनावी प्रभाव: अवध और पूर्वांचल के प्रमुख जिलों जैसे अयोध्या, रायबरेली, मिर्जापुर, गोरखपुर, हरदोई और गोंडा आदि में पासी मतदाताओं की संख्या इतनी है कि वे चुनावी नतीजों को पलटने की ताकत रखते हैं।

सामाजिक कार्यकर्ता से जननेता तक का सफर

सूरज पासी अब खुद को केवल एक सामाजिक कार्यकर्ता नहीं, बल्कि एक ऐसे ‘युवा चेहरे’ के रूप में पेश कर रहे हैं जो अपने समाज के अधिकारों और सांस्कृतिक विरासत को लेकर मुखर है। मलिहाबाद में महाराजा कंसा पासी के किले को लेकर उनके द्वारा शुरू किया गया आंदोलन यह दर्शाता है कि वे अपने समाज के गौरव को लेकर कितने आक्रामक और सजग हैं।

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