ईरान-US जंग: भारत-पाक मामले में ‘क्रेडिट’ लेने वाले ट्रंप खुद के नुकसान पर क्यों हैं मौन

वाशिंगटन/नई दिल्ली: राजनीति में ‘दोहरे मापदंड’ की चर्चा अक्सर होती है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ताजा रुख इस वक्त वैश्विक कूटनीति में चर्चा का विषय बना हुआ है। पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान गिरे विमानों की संख्या उंगलियों पर गिनाने वाले ट्रंप, आज ईरान द्वारा अमेरिकी लंका लगाए जाने पर पूरी तरह खामोश हैं। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट्स ने अब उस तबाही का खुलासा किया है, जिसे वाइट हाउस और पेंटागन दुनिया से छिपाने की कोशिश कर रहे थे।


पेंटागन की ‘इमरजेंसी’ मांग: 200 अरब डॉलर और हथियारों का अकाल

ईरान के साथ जारी ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ अमेरिका के लिए एक महंगा सौदा साबित हो रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने मध्य पूर्व (Middle East) में अमेरिकी सैन्य प्रभुत्व की जड़ों पर सीधा प्रहार किया है।

  • बजट में छेद: युद्ध की बढ़ती लागत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पेंटागन ने हथियारों के खाली होते गोदामों को भरने के लिए 200 अरब डॉलर (लगभग ₹16.7 लाख करोड़) के इमरजेंसी फंड की मांग की है।

  • मिसाइलों का खर्च: अमेरिका ने ईरान पर हजारों टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें दागीं, जिनमें से एक की कीमत करीब 35 लाख डॉलर है। शुरुआती एक हफ्ते में ही अमेरिका के 11.3 बिलियन डॉलर धुआं हो चुके हैं।


ईरान ने ऐसे लगाई ‘लंका’: 11 सैन्य ठिकानों पर भारी तबाही

ईरान के जवाबी हमलों ने अमेरिकी सैन्य अड्डों की सूरत बदल दी है। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, नुकसान उतना नहीं है जितना बताया गया, बल्कि उससे कहीं गुना ज्यादा विनाशकारी है:

  • नौसेना को चोट: बहरीन स्थित अमेरिकी नौसेना के ‘पांचवें बेड़े’ (5th Fleet) के मुख्यालय को गंभीर क्षति पहुंची है।

  • रनवे और हैंगर तबाह: कतर का अल-उदीद एयरबेस और कुवैत का अली अल सलेम एयरबेस अब इस्तेमाल के लायक नहीं बचे हैं। इराक के इरबिल में स्थित हथियार डिपो को ईरान ने पूरी तरह मटियामेट कर दिया है।

  • महंगे विमानों का नुकसान: हमलों में करोड़ों डॉलर के MQ-9 रीपर ड्रोन, एक फाइटर जेट और दो MC-130 टैंकर विमान (जिनकी कीमत 100-100 मिलियन डॉलर है) नष्ट हो गए हैं।


भारत-पाक जंग में ‘हीरो’, खुद की बारी में ‘जीरो’?

सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि मई 2025 में जब भारत-पाक के बीच ‘ऑपरेशन सिंदूर’ हुआ था, तब ट्रंप ने रैलियों में बढ़-चढ़कर दावे किए थे।

  1. विमानों की गिनती: ट्रंप ने उस समय दावा किया था कि उन्होंने युद्ध रुकवाया और 5 से लेकर 11 विमानों के गिरने के अलग-अलग आंकड़े पेश किए थे।

  2. अब चुप्पी क्यों?: ईरान के मामले में ट्रंप ने ईरान के ‘तबाह’ होने का जुमला तो दिया, लेकिन अपने सैनिकों के हताहत होने और बेस के नुकसान पर चुप्पी साध ली है।

  3. आंकड़ों की बाजीगरी: रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन ने बिना कारण बताए हताहत सैनिकों की संख्या 428 से घटाकर 413 कर दी है, ताकि जनता के बीच आक्रोश न फैले।


जर्मनी ने कहा- “अमेरिका की हो रही है बेइज्जती”

अमेरिकी राष्ट्रपति की इस विफलता पर उनके मित्र देश भी अब उंगली उठा रहे हैं। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि ईरान बहुत चालाकी से अमेरिका को पूरी दुनिया के सामने अपमानित कर रहा है। ट्रंप प्रशासन ईरान को मेज पर लाने में नाकाम रहा है और ‘सुपरपावर’ की छवि को गहरा धक्का लगा है।

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