पाकिस्तान से क्यों रूठा ‘पुराना यार’ UAE? कर्ज की वसूली और कर्मचारियों को निकालने…

अबू धाबी/इस्लामाबाद: कंगाली के दौर से गुजर रहे पाकिस्तान को अब तक के अपने सबसे भरोसेमंद साथी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से लगातार तीन बड़े झटके लगे हैं। एक समय था जब खाड़ी देश पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए संकटमोचक माने जाते थे, लेकिन अब हालात बिल्कुल बदल चुके हैं। यूएई ने न केवल अपने अरबों डॉलर का कर्ज वापस मांग लिया है, बल्कि वहां काम कर रहे पाकिस्तानी पेशेवरों को भी देश से बाहर का रास्ता दिखाना शुरू कर दिया है।

आइए समझते हैं कि आखिर यूएई पाकिस्तान से इतना खफा क्यों है और भारत से बढ़ती दोस्ती का इसमें क्या रोल है।


1. एतिहाद एयरवेज का झटका: 48 घंटे में देश छोड़ने का आदेश

यूएई की प्रमुख एयरलाइन एतिहाद एयरवेज ने हाल ही में अपने 15 पाकिस्तानी कर्मचारियों को बिना किसी पूर्व सूचना के नौकरी से निकाल दिया। यह कोई सामान्य छंटनी नहीं थी, क्योंकि:

  • इन कर्मचारियों को सीधे इमिग्रेशन ऑफिस बुलाया गया।

  • उन्हें महज 48 घंटे के भीतर यूएई छोड़ने (डिपोर्टेशन) का सख्त आदेश दिया गया।

  • हैरानी की बात यह है कि इनमें से कई कर्मचारी 20 साल से वहां सेवाएं दे रहे थे।

  • विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रक्रिया में इमिग्रेशन विभाग का शामिल होना यह दर्शाता है कि यह अबू धाबी की तरफ से पाकिस्तान को दिया गया एक कड़ा कूटनीतिक संदेश है।

2. 3.45 अरब डॉलर के कर्ज की अचानक मांग

पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी मुसीबत तब खड़ी हुई जब यूएई ने 3.45 अरब डॉलर (करीब 29,000 करोड़ रुपये) के लोन की वापसी का दबाव बनाया।

  • यह कर्ज 2019 में पाकिस्तान की डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए दिया गया था।

  • पाकिस्तान को उम्मीद थी कि यूएई 2027 तक यह पैसा वापस नहीं मांगेगा।

  • अबू धाबी की इस सख्ती के कारण पाकिस्तान को मजबूरन सऊदी अरब से मिली नई मदद का इस्तेमाल यूएई का पुराना कर्ज चुकाने में करना पड़ा। यानी पाकिस्तान के पास खुद का पैसा नहीं बचा, बस एक का कर्ज दूसरे से चुकाया गया।


3. भारत से बढ़ती नजदीकी और रणनीतिक बदलाव

यूएई के इस बदले हुए तेवर के पीछे भारत के साथ उसकी प्रगाढ़ होती दोस्ती एक मुख्य कारण है:

  • निवेश और भरोसा: यूएई अब भारत को एक उभरती वैश्विक शक्ति और भरोसेमंद आर्थिक साझेदार के रूप में देखता है। भारत के बुनियादी ढांचे और तकनीक में यूएई भारी निवेश कर रहा है।

  • रणनीतिक साझेदारी: हाल के महीनों में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और एनएसए अजीत डोभाल के यूएई दौरों ने रिश्तों को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है। ऐसी खबरें हैं कि प्रधानमंत्री मोदी अपनी आगामी यूरोप यात्रा के दौरान यूएई में रुक सकते हैं।

  • ईरान का मुद्दा: यूएई चाहता था कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान स्पष्ट रुख अपनाए, लेकिन पाकिस्तान का ‘तटस्थ’ (Neutral) रहने का नाटक अबू धाबी को रास नहीं आया।


4. सऊदी बनाम यूएई: होड़ में पिसा पाकिस्तान

खाड़ी क्षेत्र में अपना दबदबा कायम करने के लिए सऊदी अरब और यूएई के बीच एक अदृश्य प्रतिस्पर्धा चल रही है।

  • पाकिस्तान इस समय पूरी तरह सऊदी अरब के आर्थिक फंड पर निर्भर है।

  • पाकिस्तान का सऊदी के खेमे में ज्यादा झुकना यूएई को पसंद नहीं आ रहा है।

  • इसके अलावा, यूएई की बड़ी टेलीकॉम कंपनी ‘e&’ (एतिसलात) भी पाकिस्तान की बदहाल आर्थिक स्थिति और जटिल राजनीति के कारण वहां से अपना निवेश समेटने की तैयारी में है।

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