पेरिस में एक ऐसी ऐतिहासिक कूटनीतिक हलचल हुई है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने एक 14 सूत्रीय समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिसके साथ ही दोनों देशों के बीच लंबे समय से चला आ रहा युद्ध और सैन्य तनाव आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन की मेजबानी में पेरिस में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक के बाद जैसे ही अमेरिका ने इस समझौते का मसौदा जारी किया, यह तुरंत प्रभावी हो गया। इस बेहद गुप्त और महत्वपूर्ण दस्तावेज़ को ‘अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ नाम दिया गया है, जिसने दक्षिण एशिया से लेकर मध्य पूर्व तक की भू-राजनीति को गरमा दिया है।
होर्मुज जलडमरूमध्य खुलेगा और समृद्ध यूरेनियम होगा नष्ट
एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, इस समझौते का सबसे पहला और बड़ा असर वैश्विक व्यापार पर पड़ेगा। इसके तहत ‘स्ट्रैट ऑफ होर्मुज’ (होर्मुज जलडमरूमध्य) को तुरंत वाणिज्यिक जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा। ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम भंडार को पूरी तरह नष्ट करने के लिए प्रतिबद्ध हुआ है। इसके बदले में यदि ईरान का व्यवहार सकारात्मक रहता है, तो अमेरिका उस पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में चरणबद्ध तरीके से ढील देगा। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की कड़ी निगरानी में ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।
लेबनान समेत सभी सैन्य अभियानों पर पूर्ण विराम
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने पुष्टि की है कि ओमान और अन्य देशों की मध्यस्थता से यह बातचीत लंबे समय से गुपचुप तरीके से चल रही थी। समझौते के तहत, लेबनान सहित सभी क्षेत्रों में जारी सैन्य अभियानों को तत्काल और स्थायी रूप से रोक दिया गया है। अगले 60 दिनों के भीतर दोनों देश अंतिम स्थायी समझौते पर बातचीत पूरी करेंगे। ईरान ने इस बात की लिखित गारंटी दी है कि वह कभी भी परमाणु हथियार विकसित या हासिल नहीं करेगा, जबकि बदले में उसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग में अपनी संप्रभुता बनाए रखने का अधिकार मिला है।
ईरान को मिलेंगे 300 अरब डॉलर और जब्त संपत्तियां
इस 14 सूत्रीय समझौते के आर्थिक पहलू बेहद चौंकाने वाले हैं। अमेरिका न केवल होर्मुज जलडमरूमध्य से अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटाएगा, बल्कि ईरान की विदेशों में जब्त की गई अरबों डॉलर की संपत्तियों को भी अनलॉक करेगा। इसके अतिरिक्त, ईरानी तेल निर्यात के लिए विशेष ट्रेजरी छूट दी जाएगी और ईरान के पुनर्निर्माण तथा आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब अमेरिकी डॉलर का एक विशाल कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से किए गए अपने उस पुराने दावे को भी याद किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे दुनिया के बड़े युद्धों को रोकने की ताकत रखते हैं।
Shashwat Lokwarta – State News,Up News देश-दुनिया