क्या इस बार बेहद भीषण होगा अमेरिका-ईरान युद्ध? डोनाल्ड ट्रंप कर रहे महा-हमले की तैयारी

वाशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया में एक बार फिर महायुद्ध के बादल मंडराने लगे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब उस मुहाने पर पहुंच चुका है, जहां से वापसी नामुमकिन लग रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ एक बेहद बड़े और निर्णायक सैन्य एक्शन का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में सेना के शीर्ष कमांडरों के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद यह साफ हो गया है कि अमेरिका आने वाले दिनों में ईरान पर अब तक का सबसे भीषण हमला कर सकता है।

इजरायल में अमेरिकी एयरक्राफ्ट्स की तैनाती से बढ़ी हलचल

युद्ध की तैयारियों को अमलीजामा पहनाते हुए अमेरिका ने इजरायल के बेन गुरियन एयरपोर्ट और दक्षिणी इजरायली सैन्य ठिकानों पर दर्जनों ‘एरियल रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट’ (हवा में ईंधन भरने वाले विमान) तैनात कर दिए हैं। इजरायली अधिकारियों के मुताबिक, आने वाले समय में ऐसे और भी विमान तैनात किए जाएंगे। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इन विमानों की मौजूदगी का सीधा मतलब है कि अमेरिकी लड़ाकू विमान ईरान के भीतर बिना रुके लंबे समय तक और बेहद गहराई में जाकर तबाही मचाने की योजना बना रहे हैं।

ईरान के परमाणु और ऊर्जा ठिकाने अमेरिका के निशाने पर

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) पिछले सात दिनों से ईरान के सैन्य रसद ढांचे, भूमिगत हथियार भंडारों और निगरानी केंद्रों पर लगातार बमबारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी रणनीति ईरान को पूरी तरह झुकाने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खुलवाने की है। इसके लिए अमेरिका ईरान के उन परमाणु ठिकानों को दोबारा निशाना बना सकता है, जिन्हें ईरान ने पिछले साल के हमलों के बाद फिर से दुरुस्त कर लिया है। हालांकि, ईरान ने भी इस बार अपने यूरेनियम भंडार को जमीन में काफी नीचे छिपा दिया है।

चाबहार बंदरगाह और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान

अमेरिकी हवाई हमलों में दक्षिणी ईरान के होर्मोज़गान प्रांत के कई महत्वपूर्ण पुलों, बिजली ग्रिड और सड़क-रेल संपर्कों को भारी नुकसान पहुंचा है। इसका मुख्य उद्देश्य बंदर अब्बास बंदरगाह का संपर्क राजधानी तेहरान से काटना है। इसके अलावा, भारत के सहयोग से विकसित ओमान की खाड़ी में स्थित चाबहार बंदरगाह का एक प्रमुख समुद्री निगरानी टॉवर भी अमेरिकी हमलों में ढह गया है। अमेरिका का दावा है कि इस टॉवर का इस्तेमाल ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड जहाजों को निशाना बनाने के लिए कर रहा था।

कच्चे तेल के बाजार में हड़कंप और भारी जानी नुकसान

इस भीषण टकराव का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही बाधित होने के कारण कच्चे तेल की कीमतें 86 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। ईरान ने स्वीकार किया है कि हालिया हमलों में उसके 46 नागरिकों की मौत हुई है और 400 से अधिक घायल हुए हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी सेना ने भी माना है कि इस संघर्ष में अब तक उनके 14 सैनिकों की जान जा चुकी है और 427 जवान घायल हुए हैं। फिलहाल, अंतरिम युद्धविराम टूटने के बाद शांति के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

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