
पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका को दो-टूक शब्दों में चेताया है कि यदि वाशिंगटन ने उसके संप्रभु ठिकानों या हितों पर दोबारा हमला किया, तो इसका जवाब सिर्फ रक्षात्मक नहीं बल्कि विनाशकारी रूप से आक्रामक होगा। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के शीर्ष कमांडरों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि तेहरान ने अमेरिका के साथ केवल कुछ दिनों की सैन्य झड़प नहीं, बल्कि वर्षों तक चलने वाले एक संपूर्ण और रणनीतिक टकराव का ‘वॉर ब्लूप्रिंट’ तैयार कर लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी जा रही सैन्य कार्रवाइयों और आर्थिक नाकाबंदी की चेतावनियों के बीच ईरान ने अपनी रक्षा नीति (Military Doctrine) में बुनियादी बदलाव करते हुए अब सीधे पलटवार की रणनीति अपना ली है।
रक्षात्मक से आक्रामक मुद्रा: ईरान के नए सैन्य सिद्धांत का खुलासा
ईरान के रणनीतिक हलकों में आए इस बड़े बदलाव की पुष्टि आईआरजीसी के शीर्ष नेतृत्व ने की है। आईआरजीसी कमांडर-इन-चीफ के वरिष्ठ सलाहकार ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद रजा नकदी ने संकेत दिया है कि तेहरान अब एक लंबे समय तक खिंचने वाले संघर्ष के लिए पूरी तरह तैयार है। ईरानी अधिकारियों का मानना है कि महीनों से जारी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष टकराव ने उन्हें अमेरिकी सेना की कमजोरियों को गहराई से समझने का अवसर दिया है।
ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसका मकसद केवल हमलों से खुद को बचाना नहीं है, बल्कि ऐसा अभेद्य प्रतिरोध (Deterrence) खड़ा करना है कि भविष्य में कोई भी बाहरी शक्ति उस पर हमला करने का साहस न जुटा सके। ईरानी कमांडरों का दावा है कि उनकी भूमिगत मिसाइल निर्माण इकाइयों में दैनिक आधार पर दागी जाने वाली मिसाइलों से कहीं अधिक संख्या में नई बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों का उत्पादन हो रहा है। इसका सीधा अर्थ यह है कि महीनों की बमबारी के बावजूद ईरान का मिसाइल शस्त्रागार समाप्त होने के बजाय लगातार नवीनीकृत हो रहा है।
मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ‘नरक’ उतारने का खाका
तेहरान की जवाबी योजना का सबसे अहम हिस्सा फारस की खाड़ी और पश्चिम एशिया में फैले अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाना है। आईआरजीसी ने हालिया बयानों में खुले तौर पर कहा है कि यदि अमेरिका ने सीमा पार की, तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैनिक और नौसैनिक ठिकाने भारी तबाही का गवाह बनेंगे।
ईरान के निशाने पर मुख्य रूप से निम्नलिखित ठिकाने हैं:
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एनएसए बहरीन (NSA Bahrain): अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (5th Fleet) का मुख्यालय, जो ईरानी तटों से मिसाइल और ड्रोन की सीधी जद में आता है।
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अली अल-सलेम एयर बेस (कुवैत): अमेरिकी वायुसेना का प्रमुख लॉजिस्टिक हब।
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अल-उदैद एयर बेस (कतर): जहां अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) की अग्रिम कमान तैनात है।
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इराक और सीरिया स्थित अमेरिकी चौकियां: जिन्हें ईरान समर्थक स्थानीय गुटों और सटीक ड्रोनों के जरिए एक साथ कई दिशाओं से घेरा जा सकता है।
ईरानी रक्षा विशेषज्ञों का दावा है कि उनके पास ‘खैबर शेकन’, ‘फतेह’ हाइपरसोनिक मिसाइलें और ‘शहाब’ श्रृंखला की ऐसी लंबी दूरी की मिसाइलें मौजूद हैं जो अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम (जैसे पैट्रियट और थाड) को चकमा देकर बेस के कमांड सेंटरों को तबाह कर सकती हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य: अमेरिकी नौसेना के लिए समुद्री चक्रव्यूह
फारस की खाड़ी का प्रवेश द्वार यानी होर्मुज जलडमरूमध्य इस पूरे टकराव का केंद्र बिंदु बन चुका है। जहां अमेरिका नौसैनिक नाकाबंदी के जरिए ईरान पर दबाव बना रहा है, वहीं ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और अमेरिकी हितों के लिए सबसे बड़ा चोकपॉइंट बना रखा है।
ईरानी नौसेना ने होर्मुज के संकरे समुद्री गलियारों में स्मार्ट बारूदी सुरंगे (Smart Marine Mines), रडार-इवेडिंग फास्ट-अटैक मिसाइल बोट्स और तटीय एंटी-शिप मिसाइल बैटरियों का जाल बिछा रखा है। ईरान की रणनीति यह है कि यदि युद्ध बढ़ता है, तो वह पूरे जलमार्ग से होने वाले तेल निर्यात को पूरी तरह ठप कर देगा। यह कदम सीधे तौर पर वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख देगा, जिससे अमेरिका और उसके पश्चिमी सहयोगियों पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दबाव अत्यधिक बढ़ जाएगा।
असममित युद्ध (Asymmetric Warfare) और ड्रोन स्वार्म का खौफनाक जाल
ईरान भली-भांति जानता है कि वह पारंपरिक सैन्य शक्ति (जैसे विमानवाहक पोत या पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान) के मामले में अमेरिका की बराबरी नहीं कर सकता। इसलिए उसका पूरा प्लान असममित युद्ध रणनीति पर केंद्रित है।
तेहरान ने ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ के तहत लेबनान, इराक, यमन और सीरिया में फैले अपने नेटवर्क को एकीकृत कमान के अधीन कर लिया है। हालिया खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने इराक के विभिन्न इलाकों से सटीक ‘हदिद-110’ और ‘शाहेद’ श्रेणी के कामिकेज ड्रोन ऑपरेशंस को सक्रिय किया है। सैकड़ों ड्रोनों को एक साथ झुंड (Drone Swarm) के रूप में लॉन्च करने की यह तकनीक दुश्मन के आधुनिक रडार को भ्रमित कर देती है और महंगी इंटरसेप्टर मिसाइलों को खाली करवा देती है। लंबे टकराव के दौरान अमेरिका को अपने महंगे हथियारों और ड्रोनों का भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
वैश्विक आर्थिक संपत्तियों पर प्रहार: जंग को खाड़ी से बाहर ले जाने की धमकी
ईरान के नए युद्ध सिद्धांत में एक चौंकाने वाला पहलू यह है कि यदि उस पर अस्तित्व का खतरा मंडराया, तो वह युद्ध को केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रखेगा। आईआरजीसी के शीर्ष कमांडरों ने चेतावनी दी है कि दुनिया भर में फैले अमेरिका के हजारों रणनीतिक और आर्थिक हितों को निशाना बनाया जा सकता है।
वाशिंगटन ने ईरान की मिसाइल और परमाणु क्षमता को कुचलने के लिए जो दबाव की नीति अपनाई थी, उसके जवाब में तेहरान अब ऊर्जा बाजार के जोखिमों और अमेरिकी सैन्य खर्च की कमजोर नस को दबा रहा है। तेल की कीमतों में 150 डॉलर प्रति बैरल तक की संभावित बढ़ोतरी और वैश्विक सप्लाई चेन में व्यवधान ईरान के अघोषित आर्थिक हथियार हैं।
क्या अमेरिका पर भारी पड़ेगा ईरान का वार?
अमेरिकी रक्षा गलियारों में भी इस बात को लेकर चिंता बढ़ रही है कि ईरान के खिलाफ युद्ध को अनिश्चितकाल तक खींचना पेंटागन के लिए बेहद खर्चीला साबित हो रहा है। ईरान की रणनीति ‘घर्षण के युद्ध’ (War of Attrition) की है—यानी धीरे-धीरे दुश्मन के संसाधनों, गोला-बारूद के भंडार और राजनीतिक धैर्य को थका देना।
ईरान का संदेश साफ है: यदि अमेरिका ने सैन्य दुस्साहस जारी रखा, तो तेहरान बिना किसी समझौते के उस स्तर तक पलटवार करेगा जहां से अमेरिकी नौसैनिक और सैन्य प्रभुत्व को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी। इस तनातनी ने स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिम एशिया की यह जंग अब कूटनीतिक मेज से फिसलकर बारूद के ऐसे ढेर पर पहुंच चुकी है, जहां एक भी गलत कदम वैश्विक महायुद्ध की चिंगारी बन सकता है।
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