क्या ईरान पर अमेरिकी हमलों का ‘जहरीला धुआं’ भारत में मचाएगा कोहराम? संसद में उठी विशेषज्ञों की टीम बनाने की मांग; ट्रंप का बड़ा दावा

Environmental Threat of Iran War: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी महायुद्ध अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर अब सात समंदर पार भारत की आबोहवा पर भी पड़ने की आशंका है। सोमवार को राज्यसभा में यह मुद्दा गूंजा कि ईरान के तेल और ऊर्जा ठिकानों पर हो रही भीषण बमबारी से जो जहरीला धुआं उठ रहा है, वह हवाओं के जरिए भारत की दहलीज तक पहुंच सकता है। शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से तुरंत कदम उठाने की अपील की है। वहीं, दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के महत्वपूर्ण ठिकानों को ‘पूरी तरह नष्ट’ करने का हुंकार भरा है।

राज्यसभा में गूंजी जहरीले धुएं की आहट

शून्य काल के दौरान राज्यसभा में मामला उठाते हुए संजय राउत ने कहा कि 28 फरवरी से शुरू हुए इस युद्ध ने अब पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया है। इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान के एनर्जी सेक्टर को निशाना बनाए जाने के बाद वहां के आसमान में काला और जहरीला धुआं छा गया है। राउत ने चेतावनी दी कि यह धुआं राजस्थान, गुजरात और पंजाब जैसे सीमावर्ती राज्यों को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। उन्होंने मांग की कि भारत सरकार को तुरंत पर्यावरण विशेषज्ञों की एक उच्च स्तरीय टीम गठित करनी चाहिए ताकि इस ‘टॉक्सिक क्लाउड’ के संभावित खतरे का अध्ययन किया जा सके।

WHO की चेतावनी: जानलेवा हो सकती है ईरान की हवा

युद्ध के कारण ईरान के रिफाइनरीज और गैस पाइपलाइनों में लगी आग से कई जहरीली गैसें निकल रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी इस पर रेड अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि यह धुआं सांस लेने में तकलीफ और अन्य जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकता है। भारत में भी इस धुएं के असर से वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ सकता है, जिससे मानसून और कृषि चक्र पर भी विपरीत प्रभाव पड़ने की आशंका है।

डोनाल्ड ट्रंप का ‘ट्रुथ’ पोस्ट: “ईरान में बड़ा दिन”

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ’ पर एक पोस्ट के जरिए दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के उन ठिकानों को जमींदोज कर दिया है, जो लंबे समय से रडार पर थे। ट्रंप ने इसे “बड़ा दिन” करार दिया, हालांकि उन्होंने अभी तक नष्ट किए गए ठिकानों की सटीक पहचान उजागर नहीं की है। ट्रंप के इस बयान से साफ है कि अमेरिका अब ईरान के खिलाफ ‘आर-पार’ के मूड में है और पीछे हटने को तैयार नहीं है।

ईरान की जवाबी चेतावनी: “जमीनी हमले का इंतजार कर रहे हैं हम”

ईरान ने अमेरिका के शांति संदेशों को केवल एक ‘ढोंग’ करार दिया है। ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बघर गालिबफ ने दावा किया कि अमेरिका पर्दे के पीछे से जमीनी हमले (Ground Invasion) की साजिश रच रहा है। गालिबफ ने कहा, “दुश्मन नहीं जानता कि हमारे लोग अपनी धरती पर अमेरिकी सैनिकों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं ताकि उन्हें ऐसा सबक सिखाया जा सके जिसे दुनिया हमेशा याद रखेगी।” उन्होंने साफ किया कि ईरान की सेना और जनता किसी भी बड़े सैन्य अभियान का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

भारत पर आर्थिक और कूटनीतिक दबाव

ईरान युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल और अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है। संसद में यह मांग भी उठी कि भारत को अपनी ‘सॉफ्ट पावर’ का इस्तेमाल करते हुए इस युद्ध को रुकवाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आवाज उठानी चाहिए। यदि यह युद्ध और खिंचता है, तो भारत को केवल पर्यावरणीय ही नहीं, बल्कि भारी आर्थिक चोट भी सहनी पड़ सकती है।

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